रायपुर । वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि स्थानीय लोगों को आजीविका से जोड़ना आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वन संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किया जाए तो ग्रामीणों और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
श्री कश्यप ने अपने कोरबा प्रवास के दौरान वन आधारित आजीविका और मानव-हाथी द्वंद्व की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि वन केवल पर्यावरण संरक्षण का आधार नहीं, बल्कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण साधन हैं।
वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का किया अवलोकन
वन मंत्री पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला स्थित वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र पहुंचे। उन्होंने हरि बोल स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर वनौषधियों के संग्रहण, प्रसंस्करण और उनसे तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने समूह के उत्पादों का अवलोकन कर महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।
श्री कश्यप ने कहा कि स्थानीय वनौषधियों और अन्य वन उत्पादों के उचित प्रसंस्करण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। इससे उत्पादों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने के अवसर भी मिलेंगे।
हाथी नियंत्रण केंद्र में निगरानी व्यवस्था की समीक्षा
वन मंत्री ने पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के चोटिया स्थित हाथी नियंत्रण केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने हाथी मित्र दल के सदस्यों से हाथियों की गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी आवाजाही की जानकारी ली।
इस दौरान उन्होंने हाथी मित्र दल को मोटरसाइकिल और सुरक्षा किट प्रदान की। इससे वन क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और हाथियों की गतिविधियों की समय पर सूचना देने की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सामुदायिक भागीदारी से कम होगा मानव-हाथी द्वंद्व
श्री कश्यप ने कहा कि मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम के लिए वन विभाग के साथ स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। हाथियों की गतिविधियों की समय पर सूचना मिलने से ग्रामीणों को सतर्क किया जा सकता है और संभावित घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने हाथी मित्र दल और वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों से ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ हाथियों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने तथा लगातार निगरानी बनाए रखने का आह्वान किया।
वन संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका अहम
वन मंत्री ने स्थानीय वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों से चर्चा करते हुए कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण वन और वन्यजीव संरक्षण के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उनके स्थानीय अनुभव और सहयोग से संरक्षण गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वन संरक्षण, वन आधारित आजीविका और वन्यजीव सुरक्षा को साथ लेकर चलना ही स्थायी विकास का मजबूत आधार है।
इस अवसर पर विधायक श्री प्रेमचंद पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन प्रबंधन समितियों के सदस्य, हाथी मित्र दल के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।