नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले पूरी तरह एआई के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते। ऐसे निर्णयों में मानवीय विवेक, दूरदर्शिता और परिस्थितियों की सही समझ की अहम भूमिका बनी रहनी चाहिए।
राष्ट्रपति मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में 66वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय पाठ्यक्रम के शिक्षकों और प्रतिभागियों से मुलाकात के दौरान संबोधित कर रही थीं। उन्होंने बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच आधुनिक प्रौद्योगिकी का संतुलित इस्तेमाल करने और समय पर प्रभावी निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में बढ़ रहीं चुनौतियां
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सुरक्षा और प्रौद्योगिकी का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में युद्ध एवं सुरक्षा के नए तरीके सामने आ रहे हैं। ऐसे में देश को अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में उभरने वाले खतरों का अनुमान लगाना और उनके अनुरूप तैयारी करना भी जरूरी है। इसके लिए संस्थागत क्षमता, दूरदर्शिता और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की योग्यता विकसित करनी होगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा अब सैन्य ताकत तक सीमित नहीं
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा अब केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें तकनीकी क्षमता, वैज्ञानिक अनुसंधान, आर्थिक मजबूती और नवाचार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच करीबी सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि नए विचारों और प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक समाधानों में बदलना समय की मांग है। इस तरह का समन्वय देश की रक्षा तैयारियों को अधिक प्रभावी बना सकता है।
कम लागत वाली रक्षा तकनीक और नवाचार पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने ऐसी कम लागत वाली प्रौद्योगिकियों के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया, जो उन्नत रक्षा प्रणालियों को सहयोग दे सकें और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करें।
उन्होंने अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इससे देश अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित कर सकता है।
मजबूत अर्थव्यवस्था भी राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत होना भी जरूरी है। आर्थिक स्थिरता और बाहरी परिस्थितियों से निपटने की क्षमता किसी भी देश की रणनीतिक शक्ति को मजबूत करती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी कारणों से उत्पन्न बाधाओं का सामना करने की क्षमता दिखाई है। साथ ही, भारत ने अपने रणनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लेने की क्षमता भी बनाए रखी है।
राष्ट्रपति के संबोधन का प्रमुख संदेश यह रहा कि आधुनिक तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन उसका इस्तेमाल मानवीय विवेक, वैज्ञानिक समझ और जिम्मेदार निर्णय प्रक्रिया के साथ किया जाना चाहिए।