मावल। महाराष्ट्र की बैलगाड़ी दौड़ में अपनी रफ्तार और शानदार प्रदर्शन के लिए मशहूर ‘ओम्या बैल’ का निधन हो गया। 27 अगस्त की दोपहर ओम्या की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। उसके निधन की खबर से मावल तालुका में बैलगाड़ी मालिकों और उसके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में ओम्या को अंतिम विदाई दी गई।
ओम्या को उसके मालिक रामनाथ वारिंगे परिवार के सदस्य की तरह मानते थे। करीब 9 वर्षों तक महाराष्ट्र की अलग-अलग बैलगाड़ी दौड़ों में ओम्या ने अपनी रफ्तार का दबदबा बनाए रखा। एक प्रतियोगिता में करीब 1200 बैलगाड़ियों के बीच पहला स्थान हासिल करने का रिकॉर्ड भी उसके नाम रहा। बताया जाता है कि उसने यह दौड़ महज 11 सेकंड 22 के समय में पूरी की थी।
जीत ने बदल दी मालिक की किस्मत
ओम्या की कामयाबी सिर्फ ट्रॉफियों तक सीमित नहीं रही। उसने अपनी जीत के दम पर मालिक रामनाथ वारिंगे को करोड़ों रुपये मूल्य के इनाम दिलाए। अलग-अलग प्रतियोगिताओं में ओम्या ने 3 JCB, 8 थार, 12 ट्रैक्टर, 175 बाइक, 25 चांदी की गदा और 1500 से अधिक पदक जीते थे। इसके अलावा उसे बुलेट, स्वर्ण पदक और नकद पुरस्कार भी मिले।
ओम्या को उसकी शानदार रफ्तार के कारण ‘मावल किंग’, ‘भारत केसरी’, ‘महाराष्ट्र केसरी’, ‘मावल की राजधानी एक्सप्रेस’ और ‘तूफानी गति का बेताज बादशाह’ जैसे नामों से भी जाना जाता था। साल 2024 में मावल महोत्सव के दौरान उसे विशेष रूप से ‘मावल किंग’ के रूप में सम्मानित किया गया था।
खास डाइट और परिवार जैसा ख्याल
ओम्या की फिटनेस और ताकत बनाए रखने के लिए उसकी डाइट का भी खास ध्यान रखा जाता था। उसे उड़द दाल, मूंगफली का आटा, नमक, घी, अंडे और बादाम जैसे पौष्टिक आहार दिए जाते थे। मालिक रामनाथ वारिंगे के लिए ओम्या सिर्फ प्रतियोगिता जीतने वाला बैल नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य था।
अचानक बिगड़ी तबीयत और मौत
जानकारी के मुताबिक, 27 अगस्त को ओम्या ने रोज की तरह पानी पिया और कुछ देर शांत बैठा रहा। इसके बाद वह अपने सींगों से मिट्टी खोदने लगा। करीब आधे घंटे बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। पशु चिकित्सकों के अनुसार, आशंका है कि किसी जहरीले जीव के काटने के कारण उसकी मौत हुई।
ओम्या के निधन के बाद अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में बैलगाड़ी प्रेमी पहुंचे। मालिक रामनाथ वारिंगे को भावुक देखकर वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। लोगों ने ओम्या को मावल का गौरव बताते हुए श्रद्धांजलि दी।