नई दिल्ली । दक्षिण भारत में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला मासिक कार्तिगाई पर्व आज, मंगलवार को मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान कार्तिकेय, जिन्हें भगवान मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है, की आराधना को समर्पित है। इस अवसर पर श्रद्धालु शाम को घर के पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर दीप जलाकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दीप प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है।
आज कब शुरू होगा कृत्तिका नक्षत्र?
पंचांग के अनुसार, 27 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 39 मिनट पर कृत्तिका नक्षत्र शुरू होगा, जो 28 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इस बार शाम के समय कृत्तिका नक्षत्र रहने के कारण श्रद्धालु संध्याकाल में भगवान मुरुगन की पूजा और दीप प्रज्वलन कर सकते हैं।
- कृत्तिका नक्षत्र प्रारंभ: 27 अक्टूबर, दोपहर 3:39 बजे
- कृत्तिका नक्षत्र समाप्त: 28 अक्टूबर, दोपहर 1:26 बजे
ये समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
मासिक कार्तिगाई पर दीप जलाने की परंपरा क्यों?
तमिल हिंदू परंपरा में मासिक कार्तिगाई का संबंध प्रकाश, आध्यात्मिकता और भगवान मुरुगन की उपासना से है। इस दिन घरों में दीप जलाना ईश्वर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीप का प्रकाश अंधकार पर प्रकाश की विजय और जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक है। श्रद्धालु दीप जलाकर परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।
भगवान कार्तिकेय का कृत्तिका नक्षत्र से क्या संबंध है?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव से निकली छह दिव्य चिंगारियों से भगवान कार्तिकेय का प्राकट्य हुआ था। छह कृत्तिकाओं ने उनका पालन-पोषण किया। इसी कारण भगवान कार्तिकेय को कार्तिकेय और षण्मुख जैसे नामों से भी जाना जाता है।
दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को मुरुगन के नाम से विशेष रूप से पूजा जाता है। कृत्तिका नक्षत्र से उनके संबंध के कारण इस नक्षत्र में उनकी आराधना को धार्मिक महत्व दिया जाता है।
मासिक कार्तिगाई पर शाम को कैसे करें पूजा?
श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा कर सकते हैं। सामान्य रूप से पूजा की विधि इस प्रकार है:
- पूजा स्थल की सफाई करें: घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करके भगवान कार्तिकेय अथवा मुरुगन की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- फूल और फल अर्पित करें: भगवान को फूल, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।
- दीप प्रज्वलित करें: शाम को पूजा स्थल और घर के मुख्य द्वार पर मिट्टी के दीप जलाएं। दीपक में घी या तेल का उपयोग अपनी परंपरा के अनुसार कर सकते हैं।
- मंत्र जाप और प्रार्थना करें: भगवान मुरुगन का स्मरण करें और परिवार के कल्याण की कामना करें।
- आरती करें: पूजा के अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।
पूजा के दौरान दीपों की संख्या और व्रत के नियम परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
मासिक कार्तिगाई और कार्तिगाई दीपम में क्या अंतर है?
मासिक कार्तिगाई प्रत्येक महीने कृत्तिका नक्षत्र के अवसर पर मनाया जाने वाला पर्व है। इसके विपरीत, कार्तिगाई दीपम तमिल महीने कार्तिगाई में मनाया जाने वाला वार्षिक दीपोत्सव है।
वार्षिक कार्तिगाई दीपम का प्रमुख आयोजन तमिलनाडु के तिरुवन्नामलै में होता है, जहां अरुणाचल पर्वत पर विशाल दीप प्रज्वलित किया जाता है। यह परंपरा भगवान शिव के दिव्य प्रकाश से जुड़ी मानी जाती है।
इस प्रकार, 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा मासिक कार्तिगाई पर्व भगवान मुरुगन की पूजा और दीप प्रज्वलन के लिए विशेष अवसर है। श्रद्धालु शाम को दीप जलाकर अपनी आस्था व्यक्त कर सकते हैं।
धार्मिक सूचना: पूजा-विधि और शुभ समय से जुड़ी जानकारी पंचांग तथा स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। यहां बताए गए धार्मिक फल आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं।