रायपुर | छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात कर बस्तर संभाग के सात जिलों के 461 दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव भी केंद्रीय मंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन गांवों में वर्षों तक नक्सल हिंसा के कारण विकास कार्य प्रभावित रहे, वहां अब बिजली जैसी बुनियादी सुविधा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये है, जिसमें तीन वित्तीय वर्षों के दौरान केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार वर्ष 2026-27 में 85 करोड़ रुपये, 2027-28 में 250 करोड़ रुपये और 2028-29 में 100 करोड़ रुपये की सहायता अपेक्षित है, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी।
मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत इस प्रस्ताव को विशेष प्रकरण मानते हुए शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि इन गांवों तक बिजली पहुंचने से आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा लघु उद्योगों को नई गति मिलेगी।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत प्रस्ताव प्राप्त होते ही उसकी स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और केंद्र सरकार बस्तर के विकास के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और नई संभावनाओं का प्रतीक बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि 461 गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाना क्षेत्र के समग्र विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।