रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जल संसाधन विभाग ने विभिन्न जिलों में 21 सिंचाई योजनाओं के लिए कुल 76 करोड़ 93 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृत राशि से जलाशयों के जीर्णोद्धार, नहरों की सीसी लाइनिंग, एनीकट निर्माण, तट संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण सहित विभिन्न कार्य किए जाएंगे।
कांकेर और कोंडागांव में कई योजनाओं को मंजूरी
कांकेर जिले में कोयलीबेड़ा ब्लॉक के पी.व्ही. 114 लघु जलाशय के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग के लिए 2.72 करोड़ रुपये, पी.व्ही. 36 जलाशय के लिए 4.96 करोड़ रुपये और पानीडोबरी एनीकट-कम-काजवे के लिए 3.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं चारामा के गोलकुम्हड़ा जलाशय के लिए 4.50 करोड़ और मरकाटोला व्यपवर्तन की कन्हारपुरी शाखा नहर लाइनिंग के लिए 4.99 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।
कोंडागांव जिले में बड़ेडोंगर जलाशय के लिए 3.35 करोड़, लंजोड़ा उद्वहन योजना के लिए 3.88 करोड़, श्यामपुर व्यपवर्तन के लिए 3.45 करोड़, घोड़ागांव एनीकट मरम्मत एवं गेट निर्माण के लिए 4.28 करोड़ तथा सोनाबाल जलाशय के लिए 1.95 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
बस्तर संभाग में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण पर जोर
बस्तर जिले में मुंजला तालाब के लिए 2.47 करोड़ और ग्राम संतोषा में मारकंडी नदी पर स्टॉपडेम निर्माण के लिए 3.45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जगदलपुर में इंद्रावती नदी पर तट संरक्षण एवं बाढ़ प्रबंधन के लिए 4.04 करोड़ तथा बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए 4.15 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।
चित्रकोट जलप्रपात में कैन्टीलीवर ग्लासडेक ब्रिज निर्माण के लिए भी 4.90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
दंतेवाड़ा, सुकमा और अन्य जिलों को भी मिली राशि
दंतेवाड़ा जिले में बारसूर जलाशय के जीर्णोद्धार के लिए 4.99 करोड़, कुम्हाररास जलाशय के लिए 4.98 करोड़ और बालूद एनीकट के लिए 2.92 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन कार्यों से बड़ी मात्रा में कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सुकमा जिले के कोण्टा स्थित बण्डा जलाशय के उन्नयन के लिए 1.74 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा बीजापुर में निरीक्षण गृह निर्माण के लिए 1.90 करोड़ और नारायणपुर में शासकीय एवं जल संसाधन कार्यालय भवनों के जीर्णोद्धार तथा पाइपलाइन सुधार के लिए 4.07 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
इन योजनाओं के माध्यम से सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ जल संसाधन अधोसंरचना को मजबूत करने और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।