एयरोस्पेस में भारत की बड़ी उपलब्धि: स्वदेशी स्टार्टअप ने किया एडवांस सुपरसोनिक इंजन का सफल परीक्षण

चेन्नई। भारत ने एयरोस्पेस और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय स्टार्टअप D-Propulse ने अपने स्वदेशी 5 kN एयर-ब्रीदिंग रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन (RDE) का सफल परीक्षण किया है। इस तकनीक को भविष्य की सुपरसोनिक मिसाइलों, हाई-स्पीड ड्रोन और एडवांस एयरोस्पेस सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आईआईटी मद्रास से इनक्यूबेटेड इस स्टार्टअप ने सरकारी टेस्ट रिग सुविधा में इंजन का परीक्षण पूरा किया। कंपनी के अनुसार, इंजन ने टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल-5 (TRL-5) हासिल कर लिया है, यानी यह तकनीक अब प्रयोगशाला परीक्षणों से आगे बढ़कर वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल के लिए तैयार होने की दिशा में पहुंच गई है।

कम हवा के प्रवाह में भी पैदा किया 5 kN थ्रस्ट

कंपनी के फाउंडर और CEO सौरव झा के अनुसार, परीक्षण के दौरान इंजन ने कम एयर मास फ्लो के बावजूद स्थिर प्रदर्शन करते हुए 5 kN का थ्रस्ट पैदा किया। यह क्षमता छोटी क्रूज मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले इंजन के बराबर मानी जा रही है।

उन्होंने बताया कि आगे के परीक्षणों और डिजाइन सुधार के बाद इसकी क्षमता और बढ़ाई जा सकती है।

क्या है रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन तकनीक?

रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन (RDE) पारंपरिक जेट इंजनों से अलग तकनीक पर काम करता है। इसमें ईंधन को सामान्य दहन प्रक्रिया की जगह सुपरसोनिक विस्फोट तरंगों के जरिए जलाया जाता है।

इस तकनीक के फायदे—

  • ज्यादा ऊर्जा दक्षता
  • कम ईंधन खपत
  • कम चलने वाले पुर्जे
  • ज्यादा गति और बेहतर प्रदर्शन

माने जाते हैं।

भविष्य की मिसाइलों और ड्रोन में हो सकता है इस्तेमाल

इस स्वदेशी इंजन तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में—

  • हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों
  • हाई-स्पीड सैन्य ड्रोन (UAV)
  • एडवांस लड़ाकू विमानों
  • पुन: उपयोग किए जाने वाले स्पेस लॉन्च सिस्टम

में किया जा सकता है।

कुछ ही देशों के पास है यह तकनीक

रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन जैसी अत्याधुनिक प्रोपल्शन तकनीक पर दुनिया के चुनिंदा देश ही काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में भारत की प्रगति रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

D-Propulse में रक्षा क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ जुड़े

D-Propulse की स्थापना 2025 में हुई थी। कंपनी से जुड़े विशेषज्ञों में DRDO के पूर्व वैज्ञानिक और रक्षा क्षेत्र के अनुभवी लोग शामिल हैं। कंपनी को 2026 में शुरुआती निवेश के रूप में फंडिंग भी मिली है।

यह उपलब्धि भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा तकनीक विकास की दिशा में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।

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