नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से बाहर किए गए 13.3 करोड़ लोगों को कथित तौर पर ‘घुसपैठिया’ बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे भारतीयता का अपमान करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। खरगे ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी पाबंदियों को लेकर भी सवाल उठाए। स्रोत
‘पहले वोट चोरी, अब विरोध के अधिकार की चोरी’
कांग्रेस अध्यक्ष ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल से जंतर-मंतर को हटाने का मुद्दा गंभीर है।
खरगे ने आरोप लगाया कि पहले ‘वोट चोरी’ और अब विरोध करने के अधिकार की चोरी भाजपा की तानाशाही का प्रमाण है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए और केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
SIR को लेकर चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और मृत, दोहराव वाले या अपात्र मतदाताओं की प्रविष्टियों को हटाना बताया गया है। इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद जारी है। स्रोत
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और गिरफ्तारियों को लेकर विवाद
खरगे की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कॉकroach जनता पार्टी (CJP) से जुड़े कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए निजी मुचलके पर पाबंद किया गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इन कार्यकर्ताओं पर प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में निजी परिसर के रास्ते प्रवेश करने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप हैं।
विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज लहराने वाले युवाओं को जेल भेजे जाने पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, पुलिस ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा कदम बताया है। स्रोत
राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार
SIR, मतदाता सूची से नाम हटाने और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इन मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है, जबकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है।
खरगे के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।