करवा चौथ 29 अक्टूबर को, शाम 5:38 से 6:56 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त; अहोई अष्टमी 1 नवंबर को

नई दिल्ली । करवा चौथ और अहोई अष्टमी व्रत को लेकर महिलाओं में उत्साह है। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा, जबकि संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर, रविवार को रखा जाएगा। दोनों पर्वों पर पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्रमा तथा तारों के दर्शन का समय श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

करवा चौथ पर शाम 5:38 से 6:56 बजे तक पूजा का मुहूर्त

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत का पारण किया जाता है।

  • व्रत की तारीख: 29 अक्टूबर, गुरुवार
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 से 6:56 बजे तक
  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 8:12 से 8:17 बजे के बीच

चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदल सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रमा निकलने का समय देखना चाहिए।

अहोई अष्टमी 1 नवंबर को, शाम 5:36 से 6:54 बजे तक पूजा

अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना से रखती हैं। इस दिन अहोई माता की पूजा-अर्चना की जाती है और शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है।

  • व्रत की तारीख: 1 नवंबर, रविवार
  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर, दोपहर 2:51 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर, दोपहर 1:10 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 से 6:54 बजे तक
  • तारों के दर्शन का अनुमानित समय: शाम करीब 6 बजे

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने की परंपरा है। हालांकि, तारों के दिखाई देने का वास्तविक समय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।

दोनों व्रतों का है विशेष धार्मिक महत्व

करवा चौथ और अहोई अष्टमी भारतीय परंपरा में परिवार, दांपत्य जीवन और संतान की खुशहाली से जुड़े महत्वपूर्ण पर्व हैं। करवा चौथ पर महिलाएं पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना करती हैं, जबकि अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की सलामती और सुखद भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं।

ध्यान दें: पूजा और चंद्रोदय के समय शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। व्रत करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

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