नई दिल्ली । हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद पवित्र माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में ब्रह्म मुहूर्त के दौरान स्नान करने और भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि इस महीने में श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा-पाठ करते हैं।
कार्तिक मास 2026 कब से शुरू हुआ?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर से मानी जा रही है। इसका समापन 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगा। हालांकि, कार्तिक स्नान की परंपरा कुछ पंचांग गणनाओं के अनुसार 26 अक्टूबर से ही शुरू हो गई है। तिथि और धार्मिक परंपराओं के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में गणना में अंतर हो सकता है।
कार्तिक स्नान का शुभ समय क्या है?
कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का धार्मिक महत्व बताया गया है।
ब्रह्म मुहूर्त सामान्यतः सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले शुरू होता है। इसका सटीक समय स्थान और तारीख के अनुसार बदलता है। इसलिए स्नान के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में ब्रह्म मुहूर्त का समय देखना उचित रहेगा।
धार्मिक मान्यता है कि इस समय स्नान करने, मंत्रों का जाप करने और भगवान विष्णु का स्मरण करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
स्नान के बाद जरूर करें ये पांच काम
1. भगवान विष्णु की पूजा करें: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करें। श्रद्धानुसार मंत्र जाप और प्रार्थना कर सकते हैं।
2. तुलसी के पास दीपक जलाएं: कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
3. शाम को दीपदान करें: शाम के समय घर के मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दीपदान भी कर सकते हैं।
4. जरूरतमंदों को दान दें: इस महीने में अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं।
5. भगवान का नाम स्मरण करें: कार्तिक मास में पूजा-पाठ, भजन और मंत्र जाप के लिए समय निकालना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कार्तिक मास में क्यों खास है स्नान और दान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष है। इस दौरान स्नान, दान, दीपदान और तुलसी पूजा को पुण्यदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु पूरे महीने नियमित रूप से सुबह स्नान करने और पूजा करने का संकल्प भी लेते हैं।
यदि किसी कारणवश नदी या पवित्र जलाशय में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही स्नान करके पूजा-पाठ किया जा सकता है। श्रद्धालुओं को अपनी सेहत और मौसम का ध्यान रखते हुए धार्मिक परंपराओं का पालन करना चाहिए।
ध्यान दें: ब्रह्म मुहूर्त का कोई एक निश्चित समय पूरे देश के लिए लागू नहीं होता। अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करें। भाग्य खुलने या मनोकामना पूरी होने जैसे फल धार्मिक आस्थाओं और मान्यताओं से जुड़े हैं, वैज्ञानिक रूप से सुनिश्चित परिणाम नहीं हैं।