रायपुर । छत्तीसगढ़ के स्थानीय और देशी गोवंश ‘कोसली’ के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर महत्वपूर्ण पहल की दिशा में चर्चा हुई। कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के कार्य परिषद सदस्यों ने मंगलवार को लोक भवन में राज्यपाल श्री रमेन डेका से मुलाकात कर विश्वविद्यालय की गतिविधियों और गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
मुलाकात के दौरान कार्य परिषद सदस्यों ने राज्यपाल का ध्यान छत्तीसगढ़ के विशिष्ट देशी गोवंश ‘कोसली’ की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय गोवंश की नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी ‘कोसली’ नस्ल के संरक्षण, संवर्धन और इसकी विशिष्ट पहचान को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने दिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश
राज्यपाल रमेन डेका ने ‘कोसली’ गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के विषय को महत्वपूर्ण बताते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय गोवंश की नस्लों का संरक्षण केवल पशुपालन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह जैव विविधता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक पशुपालन व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने स्थानीय नस्लों के संरक्षण के लिए संस्थागत स्तर पर प्रयासों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विश्वविद्यालय की गतिविधियों की दी जानकारी
कार्य परिषद के सदस्यों ने राज्यपाल को कामधेनु विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों और गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों से भी अवगत कराया। बैठक में देशी नस्लों के संरक्षण, उनके संवर्धन और नस्ल की पहचान को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर कार्य परिषद के सदस्य सुबोध राठी, डॉ. किरण बघेल, डॉ. भूभारती साहू और डॉ. रिपू सुदन राठौर उपस्थित रहे।
‘कोसली’ गोवंश के संरक्षण को लेकर हुई यह चर्चा छत्तीसगढ़ की स्थानीय पशुधन विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।