नई दिल्ली |सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जजों, एमिकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) और वकीलों के खिलाफ मिल रही गुमनाम (Anonymous) शिकायतों पर कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस तरह की हरकतों से न तो अदालत को डराया जा सकता है और न ही दबाव में लाया जा सकता है।
मुख्य बातें:
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गुमनाम शिकायतों पर कड़ी फटकार: 17 सितंबर को सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इन फर्जी और गुमनाम शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया।
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बिल्डरों की संदिग्ध भूमिका: यह मामला तब सामने आया जब कोर्ट सबवेंशन स्कीम (Subvention Scheme) के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में बिल्डरों की जांच पर सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट देख रहा था। कोर्ट ने आशंका जताई कि इन शिकायतों के पीछे कुछ बिल्डर और उन्हें गलत सलाह देने वाले वकील हो सकते हैं।
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CBI जांच का अल्टीमेटम: CJI ने कहा कि अदालत इन शिकायतों की तह तक जाने के लिए CBI जांच के आदेश देगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन सबके पीछे कौन लोग हैं। कोर्ट ने साफ किया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी।
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सीबीआई की कार्रवाई: इससे पहले सुनवाई में एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया था कि सीबीआई ने इस मामले में 50 FIR दर्ज कर ली हैं, जिनमें से 18 की जांच पूरी हो चुकी है और कई बैंकों के अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से साफ है कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने या दबाव बनाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ अब शिकंजा कसने वाला है।