नई दिल्ली। सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर समुदाय को समान अवसर और प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि भर्ती प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं है।
जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल ऑनलाइन आवेदन पोर्टल में ‘थर्ड जेंडर’ का विकल्प जोड़ देना पर्याप्त नहीं है। जब तक भर्ती विज्ञापनों और नियुक्ति प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं होंगे, तब तक समान अवसर सुनिश्चित नहीं हो सकता।
भर्ती विज्ञापनों में सिर्फ पुरुष-महिला श्रेणी पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई सरकारी भर्तियों, खासकर शिक्षकों की नियुक्ति के विज्ञापनों में अब भी पदों को केवल पुरुष और महिला श्रेणी में बांटा जाता है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं होता कि ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के आवेदन और नियुक्ति पर किस आधार पर विचार किया जाएगा।
अदालत ने दिल्ली सरकार को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और पूछा है कि ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर देने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
‘वे भी इंसान हैं, संवेदनशीलता से देखें’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई। अदालत ने कहा, “वे भी इंसान हैं, उन्हें थोड़ी सहानुभूति से देखें।”
कोर्ट ने कहा कि मुद्दा केवल आवेदन करने की सुविधा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि असली चुनौती नियुक्ति के समय आती है।
दिल्ली सरकार ने बताया- पोर्टल में जोड़ा गया थर्ड जेंडर विकल्प
दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पहले ऑनलाइन आवेदन प्रणाली में केवल पुरुष और महिला विकल्प उपलब्ध थे। अब इसमें बदलाव कर ‘थर्ड जेंडर’ विकल्प जोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इससे ट्रांसजेंडर उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं और भविष्य में निकलने वाली रिक्तियों में उनके आवेदन पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
हालांकि, सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग आरक्षण का फैसला नीति का विषय है, जिसे सरकार और संसद के स्तर पर तय किया जाना है।
जेन कौशिक की याचिका पर हो रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट यह सुनवाई ट्रांसजेंडर महिला जेन कौशिक की याचिका पर कर रहा है। याचिका में मांग की गई है कि सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग श्रेणी और स्पष्ट भर्ती नीति बनाई जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि केवल आवेदन का विकल्प उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि भर्ती विज्ञापनों में अब भी ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए अलग व्यवस्था नहीं है।
सरकार से मांगी गई विस्तृत जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि मौजूदा भर्ती प्रणाली में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की नियुक्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी। अदालत ने सरकार को हलफनामे के माध्यम से अपना पक्ष रखने का समय दिया है।
यह मामला ट्रांसजेंडर पर्सन्स (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के प्रभावी क्रियान्वयन और रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्रों में समान अवसर से जुड़े व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है।