राजनांदगांव। शहर के अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैदान में नए एस्ट्रोटर्फ की राह अब भी आसान नहीं हुई है। राज्य शासन की ओर से नए एस्ट्रोटर्फ के लिए करीब 6 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। पिछले करीब एक साल से नई एस्ट्रोटर्फ लगाने की प्रक्रिया कागजी कार्रवाई तक सीमित होने से खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में निराशा है।
जानकारी के मुताबिक, एस्ट्रोटर्फ के लिए राज्य स्तर पर टेंडर प्रक्रिया में तीन फर्मों के नाम सामने आए हैं। इनमें कोलकाता सहित अन्य फर्म शामिल हैं। इन फर्मों में से किसी एक का चयन किया जाना है, लेकिन प्रक्रिया लंबित होने के कारण मैदान में काम शुरू नहीं हो सका है।
पवेलियन और फ्लड लाइट की भी मांग
खेल प्रेमियों की ओर से नए एस्ट्रोटर्फ के साथ पवेलियन, फ्लड लाइट और शेड निर्माण की मांग भी लंबे समय से की जा रही है। वर्ष 2021-22 में इन सुविधाओं के लिए सर्वे कराया गया था, लेकिन अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
विधानसभा चुनाव से पहले फ्लड लाइट के लिए करीब 9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। पिछले वर्ष विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने एस्ट्रोटर्फ और फ्लड लाइट की घोषणा भी की थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया था। फिलहाल खेल विभाग के अनुसार एस्ट्रोटर्फ के लिए 6 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।
2013 में शुरू हुआ था अंतरराष्ट्रीय मैदान
राजनांदगांव के इस मैदान में वर्ष 2013 में पहली बार हॉकी मैच आयोजित हुआ था। उस समय करीब 21 करोड़ रुपये की लागत से एस्ट्रोटर्फ सहित अन्य सुविधाएं विकसित की गई थीं। करीब एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद अब मैदान का एस्ट्रोटर्फ पुराना हो चुका है।
खिलाड़ियों के मुताबिक टर्फ पर मिट्टी जमने और सतह खराब होने के कारण खेल के दौरान फिसलने की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में नए एस्ट्रोटर्फ की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।
मैदान में रखरखाव का भी अभाव
मैदान की मौजूदा स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पवेलियन की ओर दर्शकों के लिए लगाई गई कई कुर्सियां टूटने लगी हैं। नियमित रखरखाव के अभाव में इनकी स्थिति खराब हो रही है। वहीं एस्ट्रोटर्फ पर जगह-जगह काली मिट्टी जम गई है। आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाली मिट्टी के जमाव से भी टर्फ प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
खेल प्रेमियों का कहना है कि राजनांदगांव जैसे हॉकी के लिए महत्वपूर्ण शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैदान की सुविधाओं को जल्द दुरुस्त किया जाना चाहिए, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए उपयुक्त माहौल मिल सके।