UNGA में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, पेटल गहलोत ने शहबाज शरीफ के दावों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर, आतंकवाद और सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ के तहत जवाब दिया। भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए आतंकवाद और कश्मीर समेत कई मुद्दों पर पाकिस्तान को घेरा।

9/11 और ओसामा बिन लादेन का किया जिक्र

पेटल गहलोत ने अपने जवाब में 9/11 आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की एक प्रमुख सैन्य अकादमी के पास लंबे समय तक रह रहा था। उन्होंने इस संदर्भ का इस्तेमाल पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल उठाने के लिए किया।

भारत ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसकी नीति स्पष्ट है और सीमा पार आतंकवाद को लेकर वह अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के अधिकार को कायम रखता है।

‘फॉर्म 47 सरकार’ का जिक्र

पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहकर भी निशाना बनाया। पाकिस्तान की राजनीति में यह शब्द 2024 के आम चुनावों में कथित अनियमितताओं के आरोपों के संदर्भ में विपक्षी दलों और आलोचकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है।

उन्होंने पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए तथा कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों को लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर उपदेश देने से पहले अपने घरेलू हालात पर ध्यान देना चाहिए।

पाकिस्तान सरकार और सेना के रिश्ते पर टिप्पणी

भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने पाकिस्तान की सरकार पर सैन्य प्रतिष्ठान के प्रभाव का आरोप लगाते हुए उसके लोकतांत्रिक दावों पर सवाल उठाए। यह भारत की ओर से पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे पर एक सीधा कूटनीतिक हमला माना गया।

कश्मीर पर भारत का रुख दोहराया

पेटल गहलोत ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज किया। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों की स्थिति का भी मुद्दा उठाया और रावलकोट समेत वहां के हालात का उल्लेख किया।

सिंधु जल संधि पर भी दो टूक जवाब

सिंधु जल संधि को लेकर भी दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज रही। शहबाज शरीफ ने UNGA में कहा था कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान ‘युद्ध की कार्रवाई’ के तौर पर देखेगा। उन्होंने संधि को लेकर भारत के रुख की आलोचना की।

इसके जवाब में भारत ने आतंकवाद और सिंधु जल संधि के मुद्दे को आपस में जोड़ते हुए अपना पुराना रुख दोहराया कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई भारत की प्राथमिकता है। भारतीय पक्ष ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के रवैये में बदलाव के बिना दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने की प्रक्रिया प्रभावित रहेगी।

शहबाज शरीफ ने ट्रंप को दिया धन्यवाद

इससे पहले 25 सितंबर को UNGA को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि ट्रंप के हस्तक्षेप ने दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच संघर्ष को आगे बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई।

शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया तथा पाकिस्तान के रुख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा। भारत लंबे समय से भारत-पाकिस्तान मुद्दों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के विचार को स्वीकार नहीं करने की बात कहता रहा है।

UN में फिर आमने-सामने भारत-पाकिस्तान

UNGA में हुई इस बयानबाजी से साफ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद, कश्मीर और पानी के मुद्दों पर मतभेद अभी भी गहरे हैं। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंच से एक-दूसरे के दावों को चुनौती दी है और अपने-अपने रुख को दोहराया है।

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