नई दिल्ली | देश की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों में शामिल इंडियन ऑयल अब बोतलबंद पानी के कारोबार में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी जल्द ही अपने देशभर में फैले पेट्रोल पंप नेटवर्क के जरिए पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बेच सकती है।
तेल और गैस के कारोबार में बड़ा नाम रखने वाली कंपनी के लिए बोतलबंद पानी का बाजार आकार में काफी छोटा है। इसके बावजूद कंपनी इस क्षेत्र में उतरने जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह उसका विशाल रिटेल नेटवर्क और रोजाना पेट्रोल पंपों पर आने वाले करोड़ों ग्राहक माने जा रहे हैं।
बिसलेरी के बाजार में इंडियन ऑयल की एंट्री
भारत में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के बाजार में बिसलेरी लंबे समय से एक प्रमुख ब्रांड है। इसके अलावा कोका-कोला का किन्ले, पेप्सिको का एक्वाफिना और पार्ले एग्रो का बेली जैसे ब्रांड भी बाजार में मौजूद हैं।
इंडियन ऑयल का कारोबार इन कंपनियों के मुकाबले काफी अलग और कई गुना बड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 36,802 करोड़ रुपये रहा। वहीं, बोतलबंद पानी के कारोबार में बिसलेरी का वित्त वर्ष 2025-26 का नेट रेवेन्यू करीब 2,814 करोड़ रुपये और मुनाफा करीब 316 करोड़ रुपये बताया गया है।
यानी इंडियन ऑयल के लिए यह कारोबार उसके मौजूदा बिजनेस की तुलना में छोटा हो सकता है, लेकिन कंपनी के पास एक ऐसा नेटवर्क है जो उसे इस बाजार में तेजी से पहुंच बनाने में मदद कर सकता है।
43 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप बनेंगे बिक्री का जरिया
इंडियन ऑयल के पास देशभर में 43 हजार से ज्यादा आउटलेट का नेटवर्क है। कंपनी के लिए यही नेटवर्क पैकेज्ड वाटर कारोबार में सबसे बड़ा फायदा बन सकता है।
पेट्रोल पंप पर ग्राहक कुछ मिनट रुकते हैं। इस दौरान पेट्रोल-डीजल भरवाने के अलावा वे खाने-पीने की चीजें खरीदते हैं और रेस्ट एरिया या टॉयलेट जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल भी करते हैं।
ऐसे में इन्हीं आउटलेट पर बोतलबंद पानी उपलब्ध कराना कंपनी के लिए अतिरिक्त बिक्री का जरिया बन सकता है।
रोजाना करोड़ों लोगों तक पहुंच
कंपनी के विशाल नेटवर्क पर रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं। ऐसे में अलग से नया डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार करने के बजाय मौजूदा पेट्रोल पंपों को बिक्री केंद्र के रूप में इस्तेमाल करना इंडियन ऑयल की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
यही वजह है कि कंपनी के लिए पानी का कारोबार सिर्फ पानी बेचने तक सीमित नहीं है। यह उसके मौजूदा रिटेल नेटवर्क से अतिरिक्त कमाई पैदा करने का तरीका भी हो सकता है।
इंडियन ऑयल खुद नहीं बनाएगी पानी की बोतल?
इस कारोबार का एक अहम पहलू यह है कि इंडियन ऑयल खुद बोतलबंद पानी के निर्माण से लेकर पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स का पूरा काम नहीं करेगी।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्टेशन और इन्वेंट्री जैसे काम थर्ड पार्टी कंपनियों के जरिए किए जाने की योजना है।
इस मॉडल में इंडियन ऑयल अपने ब्रांड और रिटेल नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी, जबकि उत्पादन और सप्लाई चेन से जुड़े कई काम साझेदार कंपनियां संभालेंगी।
क्यों दिलचस्प है कंपनी की रणनीति?
इंडियन ऑयल के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसे बोतलबंद पानी बेचने के लिए देशभर में अलग से स्टोर और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क खड़ा नहीं करना पड़ेगा।
कंपनी के पास पहले से ही हजारों आउटलेट मौजूद हैं। इन आउटलेट पर पानी उपलब्ध कराने से ग्राहक तक पहुंच आसान हो सकती है और कंपनी अपने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर से अतिरिक्त कारोबार खड़ा कर सकती है।
बिसलेरी जैसी कंपनियों के सामने चुनौती
बोतलबंद पानी के बाजार में पहले से स्थापित ब्रांडों के सामने इंडियन ऑयल के लिए चुनौती आसान नहीं होगी। बिसलेरी की मजबूत ब्रांड पहचान और लंबे समय से बना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क उसके बड़े फायदे हैं।
इसके अलावा कोका-कोला, पेप्सिको और पार्ले एग्रो जैसी कंपनियां भी इस बाजार में मौजूद हैं।
ऐसे में इंडियन ऑयल की रणनीति का असली फायदा उसके पेट्रोल पंप नेटवर्क, ग्राहक पहुंच और ब्रांड पहचान से मिल सकता है।
छोटा बाजार, लेकिन बड़ा नेटवर्क
इंडियन ऑयल के कुल कारोबार के मुकाबले बोतलबंद पानी का बिजनेस भले छोटा हो, लेकिन कंपनी के लिए यह अपने मौजूदा नेटवर्क को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने का एक नया रास्ता है।
अगर पेट्रोल पंप पर आने वाले ग्राहक पहले से ही पानी और दूसरी जरूरी चीजें खरीदते हैं, तो कंपनी अपने आउटलेट पर खुद का पैकेज्ड वाटर उपलब्ध कराकर उस मांग का हिस्सा हासिल करने की कोशिश कर सकती है।
अब देखना यह होगा कि इंडियन ऑयल इस नए कारोबार को किस कीमत, ब्रांडिंग और वितरण रणनीति के साथ बाजार में उतारती है और क्या उसका विशाल पेट्रोल पंप नेटवर्क उसे बिसलेरी जैसे स्थापित खिलाड़ियों के मुकाबले बढ़त दिला पाता है।