नई दिल्ली । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इंडिया गठबंधन के नेताओं और सांसदों ने सोमवार को नई दिल्ली में बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई, SIR प्रक्रिया पर रोक और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों की जांच की मांग उठाई।
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया
विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका है। विपक्ष ने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
इंडिया गठबंधन के नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की अनियमितता लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने एकजुट होकर मार्च निकाला।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए नामों की जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मार्च से पहले कहा था कि विपक्षी दल लोकतंत्र और संविधान के समर्थन में एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे तथा मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने का प्रयास करेंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से किया इनकार
इस बीच, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने लंबित न्यायिक मामलों के संदर्भ में ऐसी मुलाकात को उचित नहीं माना।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि राजनीतिक गतिविधियों के कारण सुप्रीम कोर्ट के कामकाज, वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों की आवाजाही में बाधा नहीं आनी चाहिए। विपक्ष की ओर से इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग जारी है।
चुनाव आयोग और भाजपा ने आरोपों को नकारा
विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पात्र और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करने के उद्देश्य से किया जाता है तथा जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर राजनीतिक कारणों से सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।
SIR को लेकर बढ़ा राजनीतिक टकराव
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद अब न्यायिक हस्तक्षेप की मांग तक पहुंच गया है। विपक्ष इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच चाहता है, जबकि चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बता रहा है।
अब इस मुद्दे पर आगे की कानूनी कार्रवाई और संबंधित पक्षों के तर्कों पर सबकी नजर रहेगी।