छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान, कुपोषण और एनीमिया से लड़ने की तैयारी

रायपुर । छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए राज्य सरकार ‘हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान शुरू करने जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के नेतृत्व में संचालित होने वाले इस अभियान के तहत प्रदेश के घरों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में मुनगा यानी सहजन के पौधे निःशुल्क लगाए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूत करना है।

इस संबंध में मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियान की रूपरेखा तैयार करने के साथ विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

पोषक तत्वों से भरपूर है मुनगा

बैठक में मुनगा यानी सहजन की पत्तियों और फलियों के पोषण संबंधी गुणों पर चर्चा की गई। इनमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन-ए एवं विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें नियमित भोजन में शामिल करने से आहार की पोषण गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

विशेष रूप से बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया गया। अभियान के माध्यम से परिवारों को मुनगा की पत्तियों और फलियों को दैनिक भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

हालांकि, कुपोषण और एनीमिया से निपटने के लिए संतुलित आहार के साथ आवश्यक स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

फरवरी-मार्च में घर-घर वितरित होंगे पौधे

अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक घर तक मुनगा के पौधे पहुंचाने की योजना है। इसके लिए उद्यानिकी, कृषि एवं किसान कल्याण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नर्सरियों में पौधे तैयार किए जाएंगे।

योजना के अनुसार, फरवरी से मार्च के दौरान पौधों का वितरण और रोपण किया जाएगा। सभी जिलों में कलेक्टर अभियान की निगरानी करेंगे, ताकि पौधों का वितरण और उनका रोपण निर्धारित योजना के अनुसार हो सके।

23,500 स्कूलों में बनेगी पोषण वाटिका

अभियान के तहत प्रदेश के करीब 23,500 स्कूलों में मुनगा के पौधे लगाए जाएंगे। इन स्कूलों में शाला पोषण वाटिका विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही मध्याह्न भोजन में मुनगा भाजी शामिल करने पर भी जोर दिया जाएगा।

राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों, आश्रमों और छात्रावासों में भी पौधे लगाए जाएंगे। इससे बच्चों और विद्यार्थियों को पोषण संबंधी जानकारी देने के साथ पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व के प्रति जागरूक किया जा सकेगा।

डिजिटल तकनीक से होगी पौधों की निगरानी

सरकार अभियान के तहत पौधों के रोपण, सुरक्षा और सिंचाई की निगरानी के लिए डिजिटल जियो-टैगिंग और लाइव डैशबोर्ड का उपयोग करेगी। इसके माध्यम से पौधों की स्थिति, उनके जीवित रहने की दर और अभियान की प्रगति पर नजर रखने की योजना है।

इस व्यवस्था से संबंधित विभागों को पौधों की देखभाल में आने वाली समस्याओं की पहचान करने और समय पर आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी।

कई विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी

महिला एवं बाल विकास विभाग अभियान का नोडल विभाग होगा। यह विभाग आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय, हितग्राहियों की पहचान, पोषण शिक्षा और निगरानी का काम करेगा।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ग्राम पंचायतों में उपयुक्त स्थानों की पहचान, नर्सरी तैयार करने और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से अभियान का प्रचार-प्रसार करेगा।

वहीं, उद्यानिकी और कृषि विभाग गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार करने, रोपण की तकनीक, जैविक खाद और पौधों की सुरक्षा के लिए तकनीकी सहायता देंगे। वन विभाग भी इस कार्य में सहयोग करेगा।

उच्चस्तरीय बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित वन, उद्यानिकी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार की इस पहल से ग्रामीण और शहरी परिवारों तक पोषण के प्रति जागरूकता पहुंचाने तथा घरों और संस्थानों में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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