हलचल…. केदार को किसने उलझाया?, रौंदा जा रहा शहर, दोनों राज्यों की जीत, परमानेंट संविदा नियुक्ति ?, अफसरों का मोह भंग?

THethinkmedia@raipur

रौंदा जा रहा शहर

इन दिनों राजधानी के हाल ऐसे हो गए हैं, जैसे सांडों की लड़ाई में पूरे शहर को रौंदा जा रहा हो। यहां अफसरों और नेताओं की खुली लड़ाई चल रही है, पर इनके बीच में कोई नहीं आना चाह रहा है? कभी सफाई व्यवस्था को लेकर निर्वाचित जनप्रतिनिधि और अफसर लड़ते-भिड़ते नजर आते हैं, तो कभी शहर की प्रथम नागरिक महापौर एक उपायुक्त की कार्यप्रणाली के आगे बौनी साबित होती हैं? यकीं मानिए यह लड़ाई दो संाडों की लड़ाई से कम नहीं हैं, जिसके शांत होने तक पूरा शहर बर्बाद हो चुका होगा। इतना सब कुछ होने के बाद भी राजधानी की सुध लेने वाला कोई नहीं है? यहां न ही अफसरों को जनता की चिंता है, ना ही नेताओं को जनता की फिक्र। लड़ाई तो सिर्फ खुद के ईगो की है, जिसके चलते रायपुर शहर बर्बादी की कगार में पहुंच गया है। दरअसल यह लड़ाई कमजोर लीडरशिप की सबसे बड़ी तस्वीर है, जहां महापौर एक उपायुक्त को भी नहीं हटवा सकतीं। ऐसी कमजोर लीडरशिप जनता के किस काम की? महापौर की यदि उनके कार्यालय में ही न सुनी जाए, तो ऐसे में महापौर आम जनता की लड़ाई कैसे लडेंगी? खैर साढ़े 3 घंटे की टकराव के बाद भी महिला उपायुक्त अंजली शर्मा को नहीं हटाया गया है, यह रायपुर की प्रथम नागरिक ही नहीं, बल्कि ट्रिपल इंजन की सरकार के गाल पर करारा तमाचा है।

दोनों राज्यों की जीत

अक्सर हार-जीत की लड़ाई में राज्यों का विकास पीछे छूट जाता है। लेकिन विष्णुदेव के नेतृत्व वाली सरकार ने टकराव को किनारे करते हुए महानदी जल विवाद पर लगभग फतह हासिल कर ली है। राज्य सरकार दोनों राज्यों की जीत मानते हुए महानदी विवाद को सुलझाने की कगार पर पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ और उडि़सा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के स्थायी समाधान की ओर कारगर पहल होते दिख रही है। दरअसल वर्तमान में छत्तीसगढ़ और उडि़सा दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। वहीं केन्द्र में भी एनडीए की सरकार होने की वजह से इस विवाद को समाप्त करने का एक उचित और अनुकूल समय है। ऐसे में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली में आयोजित केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली बैठक में छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से राय रखी। विष्णुदेव ने स्पष्ट कहा कि महानदी केवल जल का स्त्रोत ही नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की संस्कृति, सभ्यता और कृषि की जीवनधारा है, ऐसे में टकराव की वजाय सहमति से इसका समाधान खोजना ही बेहतर है। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सकारात्मक दृष्टिकोण के चलते जल्द ही उडि़सा और छत्तीसगढ़ के बीच चल रहे महानदी विवाद पर विराम लग सकता है।

केदार को किसने उलझाया?

पिछले सप्ताहिक कॉलम हलचल में हमने लिखा था ‘ईमानदार अफसर का बेईमान कामÓ जो अब जनता के सामने उजागर हो चुका है। राज्य के एक ईमानदार अफसर ने आखिरकर प्रदेश के युवा आदिवासी चेहरे मंत्री केदार कश्यप को बुरी तरह उलझा दिया है। अब इस अफसर ने ऐसा क्यों किया? किसके कहने पर किया? फिलहाल यह तो वही जानेगें, लेकिन मंत्री केदार कश्यप की इन दिनों भद्द पिट रही है। विष्णु सरकार के तकरीबन तीन साल पूरे होने को हैं, लेकिन अब तक किसी मंत्री को इतना घेरने का प्रयास नहीं किया गया, जितना मंत्री केदार कश्यप को इन दिनों घेरा जा रहा है? पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत विपक्षी दल के ज्यादातर नेता केदार कश्यप के ऊपर प्रतिदिन राजनीतिक हमला कर रहे हैं, आखिर क्यों? केदार किसके राडार पर हैं? उन्हें आखिर कौन उलझाना चाहता है? ऐसे तामाम सवाल इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा के विषय बने हुए हैं। खैर केदार, कांग्रेस और राजनीति अपनी जगह है। असली सवाल यह है कि आखिर केदार कश्यप की पत्नी से संबद्ध जमीन की खबर किसने लीक कराई? जिस जमीन की कीमत वर्तमान में मात्र 1 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, उसे आरडीए ने रातों-रात 20 करोड़ की कीमत तक पहुंचा दिया? जमीन किसे कहां दी जाएगी, यह कौन तय करता है? किसे पता था कि यह जमीन आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है? केदार कश्यप को इन तामाम विषयों पर चिंतन और मंथन करने की जरुरत है।

परमानेंट संविदा नियुक्ति ?

राज्य सरकार ने अब परमानेंट संविदा नियुक्ति आरंभ कर दी है। यहां पंच वर्षीय संविदा नियुक्ति योजना शुरु हो चुकी है। लेकिन यह नियम सभी कर्मचारियों और अधिकारियों पर लागू नहीं हैं। वर्तमान में यह नीति सिर्फ वित्त विभाग के सचिव पर ही लागू की गई है, जिसकी पदस्थापना सीएस कार्यालय में किया गया है। दरअसल हाल ही में समान्य प्रशासन विभाग ने सरकारी सेवा से वीआरएस लेने वाली आईआरएस अअसर शीतल शाश्वत वर्मा को एक नहीं 2 भी नहीं, बल्कि 5 साल के लिए संविदा पर नियुक्त के आदेश जारी किए है। हालांकि इस दरम्यान विद्युत जनरेशन कंपनी के एमडी एस.के. कटियार की भी संविदा बढ़ाई गई है, लेकिन उन्हें एक साल की ही सेवा वृ़िद्व दी गई है। ऐसे ही मंडी बोर्ड के एमडी महेंन्द्र सवन्नी की सेवा वृद्वि एक-एक साल के लिए बढ़ाई जाती रही है। इसके अलावा भी अनेकों उदाहरण मौजूद हैं जहां अधिकारियों और कर्मचारियों को एक वर्षीय संविदा नियुक्ति ही दी जाती है। लेकिन शीतल शाश्वत वर्मा को एक साथ पांच साल की संविदा नियुक्ति दी गई है, जो सवालों के घेरे में है। अब सवाल यह उठता है कि बाकि अफसरों को पांच साल की संविदा क्यों नहीं दी जा रही? क्या चहेतों को ही पंच वर्षीय संविदा नीति का लाभ दिया जाएगा? खैर परमानेंट संविदा नियुक्ति सभी के लिए लागू नहीं है, यह सिर्फ स्पेशल लोगों की स्कीम है। नियम प्रक्रिया तो जांच का विषय है, लेकिन इस संविदा नियुक्ति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शीतल शाश्वत वर्मा की नियुक्ति विशेष उद्देश्यों के तहत की गई है, अब समूचे विपक्ष, पत्रकारों और एक्टिविस्टों का दायित्व है कि शीतल वर्मा के सरकारी कार्यो की निगरानी करें, ताकि इस परमानेंट संविदा नीति का दुरुपयोग न हो।

अफसरों का मोह भंग?

छत्तीसगढ़ पीएससी के अध्यक्ष का पद एक माह से रिक्त पड़ा है। वैसे तो रिटायरमेंट के बाद अफसर सुरक्षित और मलाईदार कुर्सी खोजते हैं। लेकिन बीते सरकार में सीजी पीएससी में हुई धांधली और सलाखों के भय ने अफसरों का मोह सीजीपीएससी से भंग कर दिया है। दरअसल सीजीपीएसी के कई पदाधिकारी इन दिनों सलाखों के पीछे हैं, ऐसे में अन्य अफसरों को भी अब पीएससी का भय सताने लगा है। आलम यह है कि अध्यक्ष पद के रिक्त होने के एक माह बीत जाने के बाद भी सरकार के पास किसी एक अफसर ने अपना बायोडाटा तक नहीं दिया है। वहीं दूसरी ओर वर्तमान सदस्यों में से कोई भी अध्यक्ष का कार्यभार संभालने का इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में सरकार के पास विकल्प कम बचे हुए हैं। वहीं अन्दरखाने में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री के सिंगापुर दौरे से वापस आते ही सीनियर आईएएस रेणु पिल्ले को सीजीपीएससी का नया अध्यक्ष बनाया जाएगा।

शालिनी छुट्टी पर क्यों?

अरण्य भवन में इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा है। 2001 बैच की आईएफएस अफसर शालिनी रैना अचानक छुट्टी पर चली गई हैं। हालांकि उनकी छुट्टी में जाने के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। कहा जा रहा है कि 2002 बैच की आईएफएस अफसर डॉ. सोमा दास की वापसी के बाद शालिनी रैना के विभागों में कटौती कर दी गई है, जिससे शालिनी खफा हैं। दरअसल शालिनी से प्रशासन वापस लेकर सोमा दास को सौंपा गया है। शालिनी रैना के पास वर्तमान में सिर्फ कैंपा का दायित्व है।

रुपयों के बंटवारे का सच क्या?

31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य नक्लसवाद मुक्त हो चुका है, लेकिन नक्सलियों द्वारा छिपाए गए हथियार, गोला-बारुद और अन्य गतिविधियों की खोजबीन लगातार जारी है। नक्सलियों के ठिकानों को लगातार अभियान चलाकर सर्च किया जा रहा है। सर्च अभियानों में भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं, वहीं करोड़ों रुपये भी बरामद करने की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन नगदी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल कहते हैं कुछ आत्मसमर्पित नक्सलियों ने खुलासा किया है कि तकरीबन 6-7 माह पहले सर्चिंग के दौरान धमतरी जिले से लगे हुए एक जिले के गांव में नक्सलियों के ठिकाने से कई लाख रुपये बरामद किए गए थे, मगर यह राशि सरकारी रिकार्ड में जमा नहीं हुई। कहा तो यह भी जा रहा है कि दो डीएसपी लेवल के अफसर इस सर्चिंग अभियान में शमिल थे, जिन्होनें यह राशि आपस में बांट ली थी। अब यह बात मीडिया के सामने आने के बाद हडकंप मंचा हुआ है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस मामले की जांच रिपोर्ट भी तैयार हो गई है। अब देखना यह है कि सिर्फ इन दोनो अफसरों के टा्रंसफर से ही विभाग खुश रहेगा या फिर कार्रवाई भी की जाएगी।

सीएम ने सौंपी रिपोर्ट कार्ड

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सिंगापुर दौरे से पहले बैक टू बैक बैंठकों में हिस्सा लिया। उन्होने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से दिल्ली में मुलाकात कर राज्य के वर्तमान राजनीतिक हालातों की चर्चा की, साथ ही सरकार की प्रोग्रेस रिपोर्ट से भी नवीन को अवगत कराया। वहीं बीते मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से राज्यों के प्रभारी और प्रदेश संगठन महामंत्रियों के साथ बैठक हुई थी। इस बैठक में छत्तीसगढ ़की नवनियुक्त प्रभारी स्मृति ईरानी पूर्व संगठन महामंत्री पवन साय, वर्तमान संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह की नितिन नवीन के साथ चर्चा हुई। पवन साय ने राज्य के वर्तमान हालातों से प्रभारी स्मृति ईरानी और कर्मवीर सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अवगत कराया। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी दिल्ली प्रवास के दौरान शुक्रवार स्मृति ईरानी से शिष्टाचार भेंट की। कहा जा रहा है कि पित्र पक्ष के बाद स्मृति ईरानी का छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है। इसके साथ ही सरकार की मध्यावधि में संगठन और सत्ता के अंदरखाने में लगातार हचलच देखी जा रही है। जिसके कारण मंत्रिमंडल में फेरबदल के कयास फिर तेज हो गए हैं। फिलहाल इन बैंठकों से यह बात छनकर नहीं निकल पा रही है कि यह बैंठकें सत्ता संगठन की मजबूती और आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से हो रही हैं, अथवा राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए इतनी एक्सरसाइज की जा रही है।

राजनीतिक हलचल बढ़ी, सोमवार को आखिर क्या होने जा रहा है?

सोमवार का दिन कोल लेवी घोटाले में फंसे नेताओं और अफसरों के लिए काफी तनाव भरा होने की आशंका है। 5 अक्टूबर को 540 करोड़ रुपये के कोल लेवी मामले पर ईओडब्ल्यू फाइनल चार्जशीट पेश करेगी। जांच एजेंसी ने सभी आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में उपस्थित रहने का समन जारी किया है। इस समन के बाद से कांग्रेस नेताओं, आईएएस अफसरों और कारोबारियों की दिल की धड़कने बढ़ी हुई हैं। आखिर पांच अक्टूबर को क्या होने वाला है?

सिंगापुर दौरे के बाद कलेक्टरों की लिस्ट

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सिंगापुर दौरे के बाद प्रस्तावित कलेक्टरों की सूची जारी होने की संभावना है। इस सूची में तकरीबन 5 से 6 कलेक्टर बदले जाने हैं। कहा जा रहा है कि यह सूची नवरात्रि में जारी कर दी जाएगी।

जनता और सरकार के बीच संवाद और प्रभावी हुआ

2012 बैच के आईएएस अफसर रजत बसंल अपनी पूर्व की ईमेज के अनुरुप वर्तमान दायित्वों में भी 100 प्रतिशत खरे उतरे हैं। रजत बंसल एक तेजतर्रार अफसर के साथ ही अपने रिजल्ट ओरिएंटेड कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। दरअसल सितंबर माह में बंसल ने जनसंपर्क आयुक्त के रुप में छह माह के कार्यकाल को पूरा किया है। उन्होंने इन छह माह में सुशासन तिहार से लेकर सभी सरकारी योजनाओं को आम जनमानस के बीच प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। रजत बसंल की कार्ययोजना के बदौलत जनसंपर्क विभाग ने आम जनता के बीच सरकार की सकारात्मक और संवेदनशील ईमेज बनाने में सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री के विषेष सचिव के साथ ही बंसल ने माइनिंग विभाग में राजस्व का रिकार्ड लक्ष्य हासिल करने में भी सफलता हासिल की है। इसी कड़ी में पत्रकारों से रेगुलर संवाद को और प्रभावी तथा सरल बनाने के लिए अब जनसंपर्क विभाग में संचालक के रुप में 2021 बैच के आईएएस अफसर आशीष टिकरिया की पदस्थापना की गई है।

editor.pioneerraipur@gmail.com

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *