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ब्लैक फॉर्च्यूनर और 15 करोड रुपये का सच क्या?
राज्य सरकार का आधा कार्यकाल बीत जाने के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की खबरों पर विराम नहीं लग रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे सिर्फ कयास बताया है। लेकिन मीडिया में आ रही खबरें कुछ और ही बयां कर रही है। दरअसल कहा जा रहा है कि एक विधायक जी को उनके पास के जिले के व्यापारी ने मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना के बीच ब्लैक फॉर्च्यूनर गिफ्ट की है। बहरहाल अब यह फॉर्च्यूनर विधायक जी ने खुद खरीदी है या फिर गिफ्ट में दी गई है यह तो वही जानेंगे। लेकिन इसकी चर्चा इन दिनों राजधानी में भी होने लगी है। वहीं दूसरी ओर एक विधायक ने मंत्री बनने के लिए 15 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है। कहा जा रहा है कि विधायक जी रेत के कारोबार में खूब कमाई की है जिसे अब वह पानी की तरह बहाने की तैयारी है।
छोकरा नाला का कायाकल्प करेगा अडाणी ग्रुप
छोकरा नाला पर अब अडानी ग्रुप का कब्जा होगा। अडानी ग्रुप नाले का कायाकल्प करेगा और नाले के पानी का उपयोग उद्योग में करेगा। दरअसल छोकरा नाला राजधानी का सबसे बड़ा नाला है, जिस पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। इस नाले के चारों ओर बिल्डरों ने अवैध कब्जा कर लिया है। नाला प्रतिदिन सिकुड़ते जा रहा है। लेकिन अब अडानी ग्रुप को सौंपने के बाद इन तमाम अवैध कब्जों को मुक्त कराया जाएगा। अभी तक नाले का पानी व्यर्थ जाता था, अब गंदा पानी भी व्यर्थ नहीं होगा। इसके साथ ही नाले के एरिया को चिंहाकित किया जाएगा तथा उसके दोनो ओर पर्यावरण को संवारने का प्रयास होगा मतलब पेड-पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही नाले के आस-पास के अवैध कब्जों को भी हटाया जाएगा। कहा जा रहा है कि सरकार ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है। वास्तव में देखा जाए तो यह पहल सराहनीय है, क्योंकि अभी तक ज्यादातर उद्योग फ्रेस वाटर का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में यदि नाली में व्यर्थ बहने वाले पानी का सदुपयोग होता है, तो इसमें बुराई ही क्या है।
पिक्चर में फिर ताम्रध्वज साहू की एंट्री
कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बदलने की संभावनाओं के बीच एक बार फिर पिक्चर में ताम्रध्वज साहू की एंट्री हो गई है। हालांकि ताम्रध्वज साहू के साथ किश्मत लुका-छिपी का खेल भी खेलती है। दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद ताम्रध्वज साहू का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो चुका था, उनके घर में पटाखे और मिठाइयां भी बंटने लगी थी, लेकिन किश्मत ने उन्हें धोखा दे दिया और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बना दिये गए। अब एक बार फिर पीसीसी चीफ के बदलने की अटकलों के बीच ताम्रध्वज साहू सक्रिय हो गए हैं। इसके लिए उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से भी मुलाकात की है। दरअसल ताम्रध्वज साहू एक समय में छत्तीसगढ से कांग्रेस के इकलौते सांसद हुआ करते थे, उस दौर से ही खरगे से ताम्रध्वज साहू की अच्छी पहचान है। कहा तो यह भी जा रहा है कि ताम्रध्वज साहू अब दबी जुबान अपने समाज के लोगों को भी कहने लगे हैं कि जल्द ही कुछ अच्छा होगा। कुल मिलाकर फिर पिक्चर में 2018 के दृश्य रिपीट होते दिख रहे है। भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू तीनों नेताओं को एक साथ कांग्रेस अलग-अलग जिम्मेदारी देकर मैदान में उतारने की तैयारी में है।
वन विभाग में फेरबदल
सीनियर आईएफएस अफसर अरुण कुमार पांडे के हेड ऑफ फारेस्ट बनने के बाद आईएफएस ओपी यादव को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं आईएफएस शालिनी रैना को कैंपा के सीइओ का प्रभार दिया गया है। इसके साथ ही जुलाई माह में आईएफएस अनिल साहू रिटायर हो रहे हैं। इसी दौरान कुछ सीसीएफ और डीएफओ भी बदले जा सकते हैं। वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडे एक प्रभावी अफसर के रुप में जाने जाते हैं। उनके टीम में कुछ और नए और काम करने वाले बेहतर अफसरों की तैनाती भी की जा सकती है। हालांकि वन बल प्रमुख पद की प्रतिद्वंदता की बात को छोड दें तो आईएफएस ओपी यादव और हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स अरुण कुमार पांडे के बीच अच्छा तालमेल है। ऐसे में वाइल्ड लाइफ समेत पूरे फॉरेस्ट विभाग में अच्छे परफारमेंस की उम्मीद जताई जा रही है।
सोशल मीडिया बनाम धरातल की राजनीति
बीते कुछ दिनों पहले कॉकरोच पार्टी का उदय हुआ। इस पार्टी ने सोशल मीडिया में ऐसा जलवा बिखेरा कि फॉलोवर्स की कतार लग गई। हैरान करने की बात तो यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा से भी ज्यादा फॉलोवर्स कॉकरोज पार्टी के देखने को मिले। निश्चित तौर पर इतने बड़े जन-समूह को साथ देखकर कोई भी बड़ा नेता बनने का सपना देख सकता है। यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ। पार्टी बनने के बाद दिल्ली स्थित जंतर-मंतर में कॉकरोच पार्टी के आंदोलन को भी सरकार ने अनुमति दे दी। लेकिन आश्चर्य जो कॉकरोच पार्टी भाजपा से भी ज्यादा सोशल मीडिया में फॉलावर्स लेकर चल रही थी, वह मुट्ठी भर भी भीड़ एकत्रित नहीं कर पाई। आंदोलनकर्ताओं की गर्मी में सांसे फूलने लगी, तरह-तरह की तस्वीरें सामने आई। कुल मिलाकर इस आंदोलन से यह सीख लेने की जरुरत है कि सोसल मीडिया के जादुई आकडों और वास्तविकता में धरती-आसमान का अतंर है। हालांकि छत्तीसगढ़ के कुछ नेताओं में भी कॉकरोच पार्टी के गुण मिलते-जुलते हैं। यहां भी नेता उठते-बैठते, सोते-जागते, खाते-पीते और काम करते हुए सोसल मीडिया में तस्वीरें शेयर करते नजर आते हैं। उन्हें भी ठीक कॉकरोच पार्टी की तरह अपने फॉलोअर्स पर अटूट भरोसा है, वहीं रियल लाइफ में नेता जी अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी मिलने में परहेज करते हैं। ऐसे में भी यदि कॉकरोच पार्टी के उदय और अंत से सबक नहीं लिया गया तो देर हो जाएगी।
भ्रष्टाचारियों को अभयदान?
राज्य का महिला एवं बाल विकास विभाग भ्रष्टाचार को लेकर सबसे ज्यादा चर्चे में है। यहां बड़े-बड़े भ्रष्टाचारियों को अभयदान दे दिया जाता है? यहां शासन-प्रशासन का भ्रष्टाचार को लेकर कोई जबाबदेही नहीं है? क्या चोरी करके माल वापस कर देने से गुनाह माफ हो जाता है? ऐसे तमाम सवालों के घेरे में इन दिनों महिला एवं बाल विकास विभाग है। दरअसल कुछ दिन पहले महिला एवं बाल विकास विभाग में खरीदी गई साडिय़ों में जमकर धांधली की गई। जांच में गड़बड़ी भी उजागर हुई, लेकिन दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई? कसूरवार सिर्फ साड़ी हो गई, जिसे बदलने का फरमान जारी कर दिया गया। खरीदने वालों और सप्लाई करने वालों की कोई जबाबदेही नहीं तय की गई? दरअसल इस मामले में गड़बड़ी उजागर होने के बाद सप्लायर को साडिय़ां बदलने का निर्देश देकर विभाग ने पल्ला झाड़ लिया। सवाल यह उठता है कि क्या इससे राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं मिलेगा? आखिर इसकी जबादेही क्यों तय नहीं की गई? क्या जांच का उद्देश्य सिर्फ गड़बड़ी तलाशना होता है? आखिर इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई कौन करेगा?
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