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मंत्री और सचिव की जोड़ी

कोल लेवी मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री का भी जिक्र?
राज्य में चर्चित कोल लेवी घोटाले में ईओडब्ल्यू ने पूरक चालान पेश कर दिया है। इस आरोप पत्र में टूटेजा और अंबलगन पी. के बीच एक चैट के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री का भी जिक्र किया गया है। आरोप पत्र में तत्कालीन खनिज सचिव अंबलगन पी. और अनिल टुटेजा के वाट्सअप चैट का जिक्र जांच एजेंसी ने किया है। दरअसल आरोप पत्र में यह जिक्र किया गया है कि 15 जून 2019 की बातचीत में अंबलगन पी. ने कोरबा की कोल वाशरियों पर औचक निरीक्षण की जानकारी दी थी। सूत्र बताते हैं कि आरोप पत्र में बताया गया है कि यह औचक निरीक्षण की कार्रवाई पूरी तरह से गोपनीय रखी गई थी। कार्रवाई की जानकारी केवल तत्कालीन कोरबा कलेक्टर और खनिज विभाग के डायरेक्टर को थी। कहतें है कि तत्कालीन खनिज सचिव अंबलगन पी. ने मामले की जानकारी और गडबड़ी टूटेजा के माध्यम से सीएम के संज्ञान में लाने को कहा, तो टुटेजा ने जवाब दिया कि ‘माननीय मुख्यमंत्री जी को इसकी जानकारी है’। हालांकि यह चैट टूटेजा और अंबलगन के बीच का है, इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री का कोई डायरेक्ट सबूत जांच एजेंसी को नहीं मिला है। बहरहाल इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री की क्या भूमिका है? इसका फैसला अब न्यायालय को करना है।
फिजूलखर्ची पर लगाम?
वित्त मंत्री ओपी चौधरी फिजूलखर्ची पर बिलकुल लगाम लगाने के पक्ष में दिख रहे हैं। मंत्री ओपी चौधरी अब नवा रायपुर में कार्यरत कर्मचारियों के लिए संचालित बसों को बंद करने की तैयारी में हैं। 31 अक्टूबर को रायपुर से नवा रायपुर के लिए संचालित बसों का अनुबंध समाप्त हो रहा है। जिसको एनआरडीए रिनवल या टेंडर करने के मूड में नहीं है। वर्तमान में 98 बसों का ठेका है, जिसमें तकरीबन 3000 से अधिक कर्मचारी नवा रायपुर जाते हैं। बसें पूरी तरह कंडम हो चुकी है, लेकिन अभी तक नई बसों का प्रबंध नहीं किया गया है। जिससे यह माना जा रहा है कि 31 अक्टूबर को नवा रायपुर और रायपुर के बीच संचालित कर्मचारी बसों के पहिए थम जाएंगे। दरअसल इसे फिजूलखर्ची माना जा रहा है। क्योंकि मंत्रालय जैसी जगह में इंडियन काफी हाउस को महज कुछ रुपये की सब्सिडी न देने के कारण हटा दिया गया है, यहां एक अलग रेस्टोरेंट को ठेके में काम सौंपा गया है। इंडियन काफी हाउस को हाटाने की प्रमुख वजह फिजूलखर्ची पर रोक लगाना था। तो अब बसों के संचालन में हो रहे कई करोड़ रुपये कीे फिजूलखर्ची पर रोक लगाना स्वाभाविक है। यह बात अलग है कि महानदी भवन में वर्तमान में संचालित रेस्टोरेंट की अनटे्रंड सर्विस, ज्यादा कीमत और खराब क्वालिटी के चलते एसीएस से लेकर सचिव स्तर के अफसर भी संतुष्ट नहीं हैं। लेकिन ओपी चौधरी भली-भांति जानते हैं कि कर्मचारियों और अधिकारियों को संतुष्ट करने के लिए वह मंत्री नहीं बने हैं, बल्कि उनकी प्राथमिकता आम जनता है। संभवत: कर्मचारियों के लिए संचालित बसों को इंडियन काफी हाऊस की तरह फिजूलखर्ची मानकर 31 अक्टूबर से बंद कर दिया जाए।
सरप्लस बिजली वाले राज्य में बिजली संकट?
त्तीसगढ़ राज्य में पहली बार बिजली संकट दिखाई दे रहा है। सरप्लस बिजली वाले राज्य में अचानक बिजली संकट क्यों खड़ा हो गया है? इससे सभी चिंतित हैं। कहा यह जा रहा है कि देशभर में इन दिनों बिजली की डिमांड बढ़ी हुई है, जिसके कारण दूसरे राज्यों से बिजली नहीं मिल पा रही है। इसलिए बिजली का संकट खड़ा हो गया है। अब कारण जो भी हो लेकिन सरप्लस बिजली वाले राज्य में बिजली का संकट होना अपने आप में सवाल बन गया है। दरअसल बिजली संकट के कारण इन दिनों उद्योगों में आधा-आधा दिन तक बिजली कटौती की जा रही है, जिसके कारण उद्योगों पर संकट खड़ा हो गया है।
ज्ञानेश कुमार और छत्तीसगढ़
इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए पूरे देश में जगह-जगह आंदोलन हो रहे हैं। समूची दिल्ली में तकरीबन 25 हजार जवानों की तैनाती की गई है। पहली बार ऐसा हो रहा है, जब सुरक्षा के लिए राज्यों से भी पुलिस बुलाई गई है। इसी विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार धार्मिक यात्रा पर छत्तीसगढ़ आने वाले थे। ज्ञानेश कुमार अपने दो दिवसीय छत्तीसगढ प्रवास पर दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के दर्शन और चित्रकोट जाने वाले थे। इसके साथ ही उनके भोरमदेव भी जाने के संकेत थे। लेकिन बढ़ते विवादों और हालातों को देखकर यह दौरा निरस्त करना पड़ा। वैसे भी दंतेश्वरी माई का छत्तीसगढ़ पर सदैव आर्शिवाद रहा है, यहां शांतिप्रिय लोग रहते हैं। ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा विवादों से घिर सकता था। खैर यह दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। अब ज्ञानेश छत्तीसगढ़ कब आयेंगे इसको लेकर विपक्ष प्रतीक्षारत है।
कलेक्टरों की लिस्ट दिसंबर तक टलने की चर्चा
प्रस्तावित छह कलेेक्टरों की लिस्ट दिसंबर तक टलने की चर्चा है। कहा जा रहा है कि बीरगांव नगर निगम समेत नगर पालिकाओं में चुनाव के मद्देनजर कलेक्टरों के ट्रांसफर दो माह के लिए रोका जा सकता है। दरअसल बीरगांव नगर निगम समेत कई नगर पलिकाओं में चुनाव होने हैं, ऐसे में नए कलेक्टरों को जिम्मेदारी देकर पार्टी और सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाह रही है। हालांकि जिन जिलों में चुनाव नहीं है, वहां के कलेक्टरों को इस बीच भी बदला जा सकता है।
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