हलचल… पीएम की अपील, भाजपा नेताओं की नौटंकी और खामोश विपक्ष

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आईएएस अफसर और जमीन

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छत्तीसगढ़ के एक आईएएस अफसर के परिजनों पर सरकारी जमीन लूटने का आरोप हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि यह जमीन मुख्यमंत्री के इलाके की है। खैर लूटने वाला कहीं भी लूट लेता है, अब इलाका किसका है यह बहुत मायने नहीं रखता। हालांकि इस अफसर को छत्तीसगढ़ की जमीन काफी फलती दिख रही है। सरकारी सेवा की शुरुआती में एसडीएम रहते हुए भी साहब को जमीन के कारोबार का खासा अनुभव रहा। दरअसल इनके एसडीएम रहते हुए कई उद्योंगो की स्थापना हुई, उसी दरम्यान से जमीन का खेल खूब फल-फूल रहा है, जो निरंतर चलते जा रहा है। अब मामला मुख्यमंत्री के इलाके तक पहुंच चुका है।

1992 बैच के अफसर डीजीपी और 1997 बैच पीएस होम

तकरीबन 15 माह के लंबे इंतजार के बाद 1992 बैच के आईपीएस अफसर अरुण देव गौतम को छत्तीसगढ़ का पूर्णकालिक डीजीपी बना दिया गया है। अभी तक अरुणदेव गौतम प्रभारी डीजीपी के रुप में सेवाएं दे रहे थे। डीजीपी को लेकर बडी-उठा-पटक की खबरें थीं, जिस पर फिलहाल पूर्ण विराम लग गया है। हालांकि डीजीपी को लेकर जो आदेश जारी किए गए हैं, उसमें भी सरकार के रणनीतिकारों ने बड़ी ही चतुराई दिखाई है। खैर इस बीच कई आईएएस अफसरों के भी तबादले हुए हैं। जिसमें गृह एवं जेल विभाग में भी परिवर्तन किया गया है। 1997 बैच की आईएएस अफसर निहारिका बारीक को गृह एवं जेल विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। निहारिका डीजीपी अरुणदेव गौतम से 5 साल की जूनियर हैं। अमूमन अभी तक यह देखने को मिलता रहा है कि डीजीपी और गृह विभाग के एसीएस में सीनियरटी और जूनियरटी का बहुत अंतर नहीं होता था, लेकिन इस बार अरुणदेव गौतम और निहारिका की सीनियरटी में बहुत अंतर है। बहरहाल दोनों सरकारी काम-काज को लेकर कैसे ट्यूनिंग बैठाते हैं? फिलहाल यह तो आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

डीजीपी के बाद अब हेड ऑफ फॉरेस्ट की बारी

सरकार पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति के बाद अब हेड ऑफ फॉरेस्ट की नियुक्ति पर मुहर लगाने जा रही है। 31 मई के पहले राज्य में नये हेड ऑफ फॉरेस्ट पर मुहर लगा दी जाएगी। हालांकि इसके लिए बीते 7 मई को डीपीसी रखी गई थी, लेकिन इसी बीच तत्कालीन एसीएस वन ऋचा शर्मा का तबादला हो गया, जिसके कारण यह डीपीसी टाल दी गई। डीपीसी में शामिल होने के लिए मध्यप्रदेश के एक सीनियर अफसर रायपुर आ चुके थे, लेकिन उन्हें अचानक वापस जाना पड़ा। तो वहीं अफसरशाही में इन दिनों यह भी चर्चा है कि वर्तमान वनबल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव को एक्सटेंशन नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वह कैम्पा के सीईओ एपीसीसीएफ ओपी यादव को हेड ऑफ फॉरेस्ट बनाने की जोरदार लाबिंग कर रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि श्रीनिवास राव ने इसके लिए अपने संपर्कों का उपयोग कर सीएम विष्णुदेव साय और उनके सचिवालय पर अच्छा खासा दबाव भी बनाया है। लेकिन इस बीच पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति में अरुणदेव गौतम पर मुहर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीएम विष्णुदेव साय और सीएम सचिवालय अब किसी भी दबाव में काम करने के मूड में नहीं हैं। बहरहाल अब देखना यह होगा की वर्तमान वनबल प्रमुख व्ही श्रीनवास राव की पंसद एपीसीसीएफ ओपी यादव पर मुहर लगाई जाती है या फिर सीएम की पसंद कहे जाने वाले अरुण कुमार पांडे हेड ऑफ फॉरेस्ट बनाये जांएगे। दरअसल 31 मई को राव के साथ तपेश झा भी रिटायर हो रहे हैं। वहीं लघु वनोपज के एमडी अनिल साहू जुलाई में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार प्रभार का चलन यहां भी अपना सकती है।

आईपीएस अफसरों के साथ कुछ आईएएस अफसर भी बदले जाएंगे

43 आईएएस अफसरों के तबादले के बाद अब आईपीएस अफसरों की सूची जारी होने के संकेत हैं। दरअसल यह सूूची इसी सप्ताह जारी होनी थी, लेकिन इस बीच केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ प्रवास पर हैं। जिसके कारण यह सूची होल्ड कर दी गई है। संभावना यह जताई जा रही है कि अगले सप्ताह में किसी भी दिन आईपीएस अफसरों के तबादले की सूची जारी की जा सकती है। इसमें तकरीबन 8-10 आईपीएस अफसरों के तबादले किए जा सकते हैं। वहीं इसी सूची के साथ कुछ और आईएएस अफसरों के बदलने की भी खबर है। बताया जा रहा है कि तकरीबन आधा दर्जन और आईएसएस अफसरों के तबादले किए जा सकते हैं।

पीएम की अपील, भाजपा नेताओं की नौटंकी और खामोश विपक्ष

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुछ दिन पहले आम जनता से यह अपील करते नजर आये कि कुछ दिनों तक पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें। सोना न खरीदें, आवश्यक यात्रा ही करें। निश्चित ही पीएम की यह अपील वर्तमान हालातों को देखते हुए राष्ट्रहित के रुप में आवश्यक मानी जा सकती है। लेकिन इस बीच छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं ने जो नौंटंकी चालू की उसने आम जनता को मुंह चिढ़ाने का काम किया है। दरअसल बीते दिनों छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की किल्लत देखने को मिली। जनता इस चिलचिलाती धूप में पेट्रोल पंपो में लंबी लाइनों की कतार में जूझते नजर आई। लेकिन हालातों को काबू करने की बजाय कई भाजपा नेताओं ने खूब नौटंकी की। कोई साइकल से दफतर जाते दिखा, तो कोई ई-रिक्शा में बैठकर वीडियो सूट कराते नजर आया। यह राजनीतिक स्टंट जनता को बिल्कुल रास नहीं आया। जनता यह भली-भांति जानती है कि यह नौटंकी मात्र है, यदि वास्तव में पेट्रोल-डीजल की बचत करनी है तो प्रतिदिन की दिनचर्या में अनुशासन अपनाकर दिखाएं, जनता उनके साथ खडी नजर आएगी। खैर इस नौटंकी के बीच पेट्रोल डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। जनता मंहगाई से हलाकान और परेशान है। लेकिन विपक्ष इस पिक्चर में कहीं नजर नहीं आ रहा है। न कहीं कोई बड़े आंदोलन दिख रहे, न ही धरातल पर कोई प्रदर्शन। सिर्फ सोसल मीडिया और फेसबुकिया आंदोलन चालाए जा रहे हैं, जिसमें जनता की बिलकुल रुचि नहीं है। लोग अब उस तस्वीर को याद कर रहे हैं जब डॉ. रमन सिंह और बृजमोहन अग्रवाल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को महगाई पर घेरते हुए सड़क पर उतर गये थे। बहरहाल नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की ऐसी कोई तस्वीर जनता को खोजने से भी नहीं मिल रही है।

31 मार्च के बाद पहली बार बस्तर पहुंचेंगे शाह

नक्सलवाद खात्मे के ऐलान के बाद पहली बार केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर जाएंगे। 31 मार्च 2026 के लक्ष्य को हासिल करने के बाद शाह का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। 18 मई से शाह दो दिन छत्तीसगढ़ प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान कई उच्चस्तरीय बैठक और कार्यक्रमों में अमित शाह शामिल होंगे। हालांकि इस दौरे के पूर्व सीएम विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर के विकास का रोडमैप भी सौंपा था। जिसके चलते अब यह माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार और अमित शाह का पूरा फोकस बस्तर के विकास में होगा। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब यहां विकास के पहिए तेजी से घूमते दिखेंगे।

सच से कोसों दूर चुनावी मुद्दे

चुनावी मुद्दे सच से कोसों दूर होते हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं सीजी पीएससी की और बीरनपुर कांड की, जो धरातल पर ढ़ेर होते नजर आ रहे हैं। सीजी पीएससी को लेकर चुनावी साल में जितना कोहराम मचाया गया, वह धरातल पर कुछ और ही नजर आ रहा है। सीबीआई की 400 पन्नों के आरोपपत्र में तकरीबन 29 आरोपी नामजद किए गए। इसमें अभ्यर्थियों के साथ-साथ सीजीपीएससी के अफसर, कारोबारी और कोचिंग संचालक के नाम शामिल थे। चयनित अभ्यर्थियों में से 13 प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि बारनवापारा के जंगलों में इनकी विशेष तैयारी कराई गई। एक आईएएस के तो दो बच्चे एक ही बार में डिप्टी कलेक्टर बन गए। पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी कहे जाने वाले आईपीएस अफसरों के बच्चे, कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों के नाम भी इसमें शामिल हैं। लेकिन आज यह मुद्दा सच से कोसों दूर खड़ा दिख रहा है। दरअसल पूर्व आईएएस टामन सिंह सोनवानी के रिश्तेदारों को छोड़कर सभी को पोस्टिंग मिल चुकी है। जांच का दायरा भी सिमट गया है और सभी बड़े नाम गायब हो गए हैं। कुल मिलाकर चुनावी साल में जितना तमाशा किया गया धरातल पर सब धराशाही होते दिख रहा है। इतना ही नहीं बिरनपुर मामला भी सिर्फ आपसी विवाद बनकर सबके सामने हैं। इन हालातों को देखकर यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि चुनावी मुद्दे सच से कोसों दूर होते हैं

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