नई दिल्ली । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को नजफगढ़ क्षेत्र की गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। इस संयंत्र को डेयरी क्षेत्रों में गोबर के बेहतर निस्तारण और अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में डेयरी कॉलोनियों में नालियों, ड्रेनेज, पानी की आपूर्ति, कूड़ा उठाने और गोबर के निस्तारण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।
डेयरी क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, दिल्ली सरकार ने पिछले डेढ़ वर्ष में तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए हैं, जबकि छह अन्य संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम जारी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य डेयरी क्षेत्रों में जमा होने वाले गोबर और जैविक कचरे का व्यवस्थित निस्तारण करना तथा स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
गोयला डेयरी में नए संयंत्र की स्थापना से स्थानीय स्तर पर गोबर के प्रबंधन को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे डेयरी क्षेत्रों में गंदगी और अपशिष्ट से जुड़ी समस्याओं को कम करने की दिशा में भी सहायता मिल सकती है।
बायोगैस से स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा
बायोगैस संयंत्रों में गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग करके गैस तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया से अपशिष्ट का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल संभव होता है और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को बढ़ावा मिलता है।
डेयरी क्षेत्रों में ऐसे संयंत्रों की स्थापना से जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन करने और पर्यावरणीय चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, संयंत्र की वास्तविक उपयोगिता उसके संचालन, अपशिष्ट की नियमित उपलब्धता और उत्पादित गैस के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करेगी।
छह और संयंत्र स्थापित करने की योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में बायोगैस संयंत्रों के विस्तार की दिशा में काम किया जा रहा है। छह अन्य संयंत्रों की स्थापना की योजना के साथ सरकार डेयरी कॉलोनियों में अपशिष्ट प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है।
गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह संयंत्र दिल्ली में जैविक अपशिष्ट के प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है।