गरियाबंद । रक्षाबंधन का पर्व गरियाबंद जिले की बिहान से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के लिए भाई-बहन के स्नेह के साथ स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर लेकर आया है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय एवं पारंपरिक सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर उनका विक्रय कर रही हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर चंद्राकर के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न विकासखंडों में महिला समूहों द्वारा राखी निर्माण और बिक्री की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय के साथ गांव स्तर पर स्वरोजगार का अवसर मिल रहा है।
स्थानीय सामग्री से तैयार हो रहीं आकर्षक राखियां
मैनपुर विकासखंड में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने राखियां तैयार कर अब तक 5,340 रुपये की लागत से 11,258 रुपये की बिक्री की है। वहीं गरियाबंद विकासखंड के सढ़ौली स्थित गायत्री स्व-सहायता समूह की चार महिलाएं धान-चावल, मूंगा, मटर, झरगा, सेमी और अरहर सहित स्थानीय सामग्री से विभिन्न डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इनकी कीमत 5 से 60 रुपये तक रखी गई है।
छुरा विकासखंड के ग्राम जामली की जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बांस से राखियां तैयार की हैं। इस वर्ष समूह ने करीब 1 हजार राखियों का स्टॉक तैयार किया है, जिन्हें रक्षाबंधन के अवसर पर बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम रोहिना की जय मां घटारानी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती कोयल साहू ने इस वर्ष लगभग 5 हजार राखियां तैयार की हैं। 5 से 40 रुपये तक की विभिन्न डिजाइनों वाली इन राखियों में से समूह ने 10 हजार रुपये की लागत से तैयार उत्पादों की अब तक 12 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की है।
आकांक्षा हाट में विशेष राखी स्टॉल
महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिले के सभी जनपद पंचायतों में केनोपी के माध्यम से राखी विक्रय स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा आकांक्षा हाट में 21 से 28 अगस्त 2026 तक विशेष राखी विक्रय स्टॉल लगाया जा रहा है।
इन स्टॉलों के माध्यम से नागरिकों को स्थानीय महिलाओं द्वारा हाथ से तैयार आकर्षक राखियां उपलब्ध होंगी। इससे ग्रामीण महिला समूहों को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार भी मिलेगा।
त्योहारों से जुड़ रहा महिला उद्यमिता का विस्तार
बिहान से जुड़ी महिलाएं अब पारंपरिक आजीविका गतिविधियों के साथ गैर-कृषि आधारित उद्यम, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग, मूल्य निर्धारण और बाजार से जुड़ाव की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। पर्व-त्योहारों को स्थानीय उत्पादों के बाजार से जोड़ने से महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिल रहे हैं।
जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को उद्यमिता विकास, कौशल उन्नयन, वित्तीय समावेशन और बाजार उपलब्धता से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राखी निर्माण जैसी गतिविधियां महिलाओं को गांव और घर के स्तर पर रोजगार देने के साथ उनके आत्मविश्वास एवं निर्णय क्षमता को भी मजबूत कर रही हैं।
जिला पंचायत ने जिलेवासियों से अपील की है कि रक्षाबंधन पर बिहान स्व-सहायता समूह की दीदियों द्वारा निर्मित स्थानीय और हस्तनिर्मित राखियों को प्राथमिकता दें तथा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में सहभागी बनें।