जटिल किरदारों से चालाक शकुनि तक: चंदन आनंद ने साझा किया अभिनय का अनुभव

मुंबई । टेलीविजन धारावाहिक ‘हस्तिनापुर के वीर’ में शकुनि की भूमिका निभा रहे अभिनेता चंदन आनंद ने अपने अभिनय सफर और इस बहुआयामी किरदार को पर्दे पर जीवंत करने के अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि हर किरदार कलाकार को अभिनय की नई बारीकियां सिखाता है और जटिल भूमिकाएं किसी व्यक्ति के स्वभाव, सोच तथा भावनाओं को गहराई से समझने का अवसर देती हैं।

शकुनि के किरदार में छिपी हैं कई परतें

‘हस्तिनापुर के वीर’ में पांडवों और कौरवों के शुरुआती जीवन, उनके रिश्तों और उन परिस्थितियों को दिखाया गया है, जिन्होंने आगे चलकर उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। इसी कहानी में शकुनि का किरदार अपनी बुद्धिमत्ता, तीक्ष्ण निरीक्षण क्षमता और दूसरों को प्रभावित करने की कला के कारण खास महत्व रखता है।

चंदन आनंद के अनुसार, शकुनि को केवल एक चालाक रणनीतिकार के रूप में देखना उसके व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। वह लोगों की कमजोरियों, उनकी भावनाओं और सोच को समझता है तथा बातचीत के जरिए परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करता है।

अभिनय की बारीकियों पर देते हैं विशेष ध्यान

चंदन आनंद ने बताया कि किसी जटिल किरदार को प्रभावी बनाने के लिए उसके बाहरी व्यक्तित्व के साथ-साथ उसकी आंतरिक सोच को समझना भी जरूरी है। संवाद बोलने का तरीका, आवाज में बदलाव, शारीरिक हाव-भाव और दूसरे पात्रों के साथ व्यवहार जैसी छोटी-छोटी बातें किरदार को वास्तविक बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि समय के साथ किसी किरदार को निभाते हुए उसकी नई परतें सामने आती हैं। यही निरंतर खोज अभिनय को रोचक बनाती है और कलाकार को अपने हुनर को बेहतर करने का अवसर देती है।

‘हस्तिनापुर के वीर’ में दिखेगा शकुनि का अलग अंदाज

धारावाहिक में शकुनि का किरदार अपनी चतुराई और रणनीतिक सोच के साथ-साथ लोगों को समझने की क्षमता के लिए भी जाना जाता है। चंदन आनंद ने इस भूमिका में संवादों और हाव-भाव के जरिए उसकी विशिष्ट पहचान उभारने का प्रयास किया है।

शो की कहानी महाभारत के परिचित पात्रों के शुरुआती जीवन और उनके आपसी संबंधों पर केंद्रित है। ऐसे में शकुनि का किरदार कहानी में उत्सुकता और नाटकीयता बढ़ाने के साथ-साथ दर्शकों को उसके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर भी देता है।

चंदन आनंद का मानना है कि अभिनय में लगातार सीखते रहना और किरदार के भीतर छिपी भावनाओं को पहचानना बेहद जरूरी है। शकुनि की भूमिका उनके लिए इसी प्रक्रिया का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां वे एक परिचित पौराणिक पात्र को अपनी अभिनय शैली के माध्यम से नया आयाम देने की कोशिश कर रहे हैं।

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