65 साल बाद फोर्ड फाउंडेशन ने खाली किया दिल्ली का दफ्तर, सरकारी नोटिस के बाद बदला ठिकाना

नई दिल्ली |  अमेरिकी गैर-लाभकारी संस्था फोर्ड फाउंडेशन ने दिल्ली के लोधी एस्टेट स्थित अपना पुराना कार्यालय खाली कर दिया है. करीब छह दशक तक इस परिसर में काम करने के बाद संस्था ने इस साल फरवरी में ऑफिस खाली किया. यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ओर से लीज खत्म होने के बाद जगह खाली करने के नोटिस के बाद हुई.

लीज खत्म हुई तो मिला ऑफिस खाली करने का नोटिस

रिपोर्ट के मुताबिक, फोर्ड फाउंडेशन का 55, लोधी एस्टेट स्थित कार्यालय लंबे समय से उसके दिल्ली ऑपरेशंस का केंद्र रहा है. केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने लीज खत्म होने के बाद संस्था को परिसर खाली करने का नोटिस दिया था.

इसके बाद फाउंडेशन ने फरवरी 2026 में ऑफिस खाली कर दिया. मार्च में संस्था ने अपनी वेबसाइट पर दिल्ली के नए पते की जानकारी भी अपडेट कर दी.

अब फोर्ड फाउंडेशन का कार्यालय संसद मार्ग स्थित डीएलएफ सेंटर में है.

अब इस जगह पर कौन रहेगा?

लोधी एस्टेट की इस इमारत की ग्राउंड और पहली मंजिल अब दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों को आवंटित की गई है.

इनमें इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA) शामिल हैं. दोनों संगठनों को भारत की पहल के तहत 2023 में लॉन्च किया गया था.

1952 में भारत आया था फोर्ड फाउंडेशन

फोर्ड फाउंडेशन की स्थापना 1936 में अमेरिका में हुई थी. संस्था ने 1952 में नई दिल्ली में अपना कार्यालय शुरू किया था. इसके बाद दशकों तक इसने भारत में शिक्षा, कृषि, रिसर्च, शहरी नियोजन और सार्वजनिक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में काम किया.

आजादी के बाद के शुरुआती वर्षों में फाउंडेशन ने भारत की कई विकास योजनाओं और संस्थानों को आर्थिक सहायता दी. दिल्ली के मास्टर प्लान, कृषि कार्यक्रमों और उच्च शिक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स में भी इसकी भूमिका रही है.

लोधी एस्टेट ऑफिस की खासियत

लोधी एस्टेट स्थित फोर्ड फाउंडेशन की इमारत को मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट जोसेफ स्टीन ने डिजाइन किया था. स्टीन ने दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर और इंडिया हैबिटेट सेंटर जैसी चर्चित इमारतों को भी डिजाइन किया था.

यह परिसर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संगठनों की मौजूदगी के लिए जाना जाता रहा है.

फोर्ड फाउंडेशन पहले भी विवादों में रहा

फोर्ड फाउंडेशन का भारत में कामकाज हमेशा विवादों से मुक्त नहीं रहा. 2015 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संस्था को वॉचलिस्ट में रखा था. उस समय गुजरात सरकार ने आरोप लगाया था कि फाउंडेशन कुछ गैर-सरकारी संगठनों को ऐसी गतिविधियों के लिए फंड कर रहा है, जिन्हें सरकार ने आपत्तिजनक माना था.

इसके बाद फोर्ड फाउंडेशन को ‘प्रायर अप्रूवल कैटेगरी’ में रखा गया था, जिसके तहत भारत में उसके फंड से जुड़े मामलों में पहले सरकारी मंजूरी जरूरी थी. मार्च 2016 में संस्था को इस सूची से हटा दिया गया था.

फिलहाल लीज खत्म होने के बाद लोधी एस्टेट का पुराना कार्यालय फोर्ड फाउंडेशन के पास नहीं है और वहां अब भारत की अगुवाई वाले दो अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों को जगह दी गई है.

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