भोपाल । पशुओं पर प्रयोग से जुड़े प्रस्तावित नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। फिल्मी हस्तियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, पशु संरक्षण संगठनों और 18 हजार से अधिक नागरिकों ने इन नियमों के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई है। सभी ने प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग की है।
पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया के अनुसार, इस मुद्दे पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर पशुओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के पक्ष में आवाज उठाई है।
जंगली पशुओं और आवारा कुत्ते-बिल्लियों की सुरक्षा पर चिंता
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि प्रस्तावित नियम लागू होने से जंगली पशुओं के साथ-साथ समुदायों में रहने वाले कुत्तों और बिल्लियों को भी प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए इस्तेमाल किए जाने का खतरा बढ़ सकता है।
उनका मानना है कि इन नियमों के मौजूदा प्रावधान पशुओं की सुरक्षा को कमजोर कर सकते हैं। इसलिए इन्हें लागू करने से पहले व्यापक समीक्षा और जरूरी बदलाव किए जाने चाहिए।
18 हजार से अधिक नागरिकों ने किया समर्थन
PETA इंडिया के मुताबिक, इस मांग को फिल्मी हस्तियों, सांसदों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और पशु कल्याण से जुड़े संगठनों के साथ 18 हजार से अधिक नागरिकों का समर्थन मिला है।
इन सभी ने प्रस्तावित नियमों को वर्तमान स्वरूप में वापस लेने की मांग उठाई है। उनका जोर पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने और प्रयोगशालाओं में उनके इस्तेमाल से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों को मजबूत बनाने पर है।
पशु संरक्षण को लेकर उठे सवाल
इस विरोध के बाद पशु प्रयोगों से जुड़े नियमों और पशु कल्याण के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था में पशुओं की सुरक्षा और उनके हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
फिलहाल प्रस्तावित नियमों को लेकर उठी आपत्तियों और उन्हें वापस लेने की मांग पर संबंधित पक्षों की आगे की कार्रवाई का इंतजार है।