पिता को BJP-NDA का साथ, बेटे को सपा का टिकट: नाथवानी परिवार की राज्यसभा कहानी ने बढ़ाई सियासी हलचल

लखनऊ  । उत्तर प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में समाजवादी पार्टी ने एक ऐसे नाम को मैदान में उतारा है, जिसने सियासी हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता परिमल नाथवानी इसी साल झारखंड से NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे हैं।

धनराज नाथवानी ने बुधवार को लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन भी दाखिल किया। सपा की ओर से उन्हें पार्टी का दूसरा उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि तीसरे उम्मीदवार के नाम का ऐलान अभी बाकी है। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होना है।

कौन हैं धनराज नाथवानी?

धनराज परिमल नाथवानी राजनीति के बजाय कॉरपोरेट और खेल प्रशासन की दुनिया में अपनी पहचान रखते हैं। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

इसके अलावा वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। खेल प्रशासन में उनकी सक्रियता लंबे समय से रही है। इसी कॉरपोरेट और खेल पृष्ठभूमि के बीच अब उनकी राजनीतिक पारी की शुरुआत राज्यसभा के रास्ते होने जा रही है।

सपा द्वारा धनराज को उम्मीदवार बनाए जाने को पार्टी की ओर से एक ‘सरप्राइज’ चयन के तौर पर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने पहले ही संकेत दिया था कि इस बार राज्यसभा उम्मीदवारों में एक चौंकाने वाला नाम सामने आ सकता है।

पिता परिमल नाथवानी भी राज्यसभा में

धनराज नाथवानी के पिता परिमल नाथवानी भी लंबे समय से राज्यसभा की राजनीति में सक्रिय हैं। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट पदाधिकारी हैं और पहले झारखंड तथा आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।

जून 2026 में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में परिमल नाथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन मिला था। चुनाव में नाथवानी को 28 प्रथम वरीयता वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की।

इस चुनाव में JMM के बैद्यनाथ राम को भी जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव हार गए थे। चुनाव के दौरान क्रॉस-वोटिंग को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था।

एक ही परिवार, अलग-अलग राजनीतिक रास्ते

यही वजह है कि धनराज नाथवानी का सपा उम्मीदवार बनना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ उनके पिता परिमल नाथवानी को राज्यसभा पहुंचने में NDA का समर्थन मिला, वहीं अब उनके बेटे धनराज नाथवानी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उच्च सदन में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि, इससे यह निष्कर्ष निकालना जरूरी नहीं कि पिता और पुत्र की राजनीतिक संबद्धता एक जैसी है। धनराज नाथवानी का अब तक का सार्वजनिक प्रोफाइल मुख्य रूप से कॉरपोरेट और खेल प्रशासन से जुड़ा रहा है, जबकि उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी सपा के टिकट पर है।

कांग्रेस के लिए क्यों चर्चा का विषय?

परिमल नाथवानी की जून में हुई जीत के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के आरोपों के बीच कांग्रेस ने इस परिणाम पर सवाल उठाए थे।

अब कुछ ही महीनों बाद उनके बेटे को उत्तर प्रदेश से सपा का राज्यसभा टिकट मिलने से कांग्रेस-सपा संबंधों के संदर्भ में भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, धनराज की उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया को इस रिपोर्ट में निर्णायक रूप से जोड़ना उचित नहीं होगा।

यूपी में राज्यसभा का गणित

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। सपा ने फिलहाल राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी के नाम घोषित किए हैं। तीसरे उम्मीदवार के नाम पर अभी फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।

यही तीसरा नाम चुनावी गणित में महत्वपूर्ण हो सकता है। विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या के आधार पर कुछ सीटों पर मुकाबला अपेक्षाकृत स्पष्ट है, जबकि अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे जाने की स्थिति में चुनावी रणनीति और विधायकों के समर्थन का महत्व बढ़ सकता है।

अब सबकी नजर तीसरे उम्मीदवार पर

सपा द्वारा धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पार्टी तीसरे उम्मीदवार के तौर पर किसे मैदान में उतारती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि नाथवानी परिवार के दो सदस्यों की राज्यसभा यात्रा अलग-अलग राजनीतिक रास्तों से आगे बढ़ रही है—पिता परिमल नाथवानी NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में और बेटा धनराज नाथवानी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में।

अब 16 अक्टूबर के राज्यसभा चुनाव और सपा के तीसरे उम्मीदवार के ऐलान के साथ उत्तर प्रदेश की सियासत में इस कहानी का अगला अध्याय सामने आएगा।

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