हैदराबाद । तेलंगाना में मानसून के दौरान कम बारिश और प्रतिकूल मौसम की वजह से सूखे की स्थिति गंभीर हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश के 31 जिलों के 365 मंडलों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 111 मंडलों को गंभीर सूखा प्रभावित और 254 मंडलों को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
111 मंडलों में गंभीर सूखे की स्थिति
राजस्व (आपदा प्रबंधन) विभाग की ओर से 24 अक्टूबर को जारी सरकारी आदेश (जीओ एमएस संख्या 03) के तहत सूखा प्रभावित क्षेत्रों का वर्गीकरण किया गया है। इसके अनुसार, 111 मंडलों में सूखे का प्रभाव गंभीर पाया गया, जबकि 254 मंडलों को मध्यम रूप से प्रभावित घोषित किया गया है।
इस फैसले से प्रभावित क्षेत्रों में सूखे की स्थिति के आकलन और राहत उपायों को व्यवस्थित तरीके से लागू करने का रास्ता साफ हुआ है।
जिला कलेक्टरों को राहत कार्य शुरू करने के निर्देश
राज्य सरकार ने संबंधित जिला कलेक्टरों को प्रभावित मंडलों में तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रभावित इलाकों में राहत और सहायता संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों, ग्रामीण आजीविका और जल उपलब्धता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
कम बारिश से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव
मानसून के दौरान अपेक्षाकृत कम बारिश होने से खेती-किसानी पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने की स्थिति में फसलों की वृद्धि, सिंचाई और ग्रामीण परिवारों की आय प्रभावित हो सकती है।
365 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला राज्य में मौसम से जुड़ी चुनौतियों की गंभीरता को दर्शाता है। अब राहत उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने पर ध्यान रहेगा।
राहत उपायों के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन के सामने प्रभावित मंडलों की जरूरतों का आकलन करने और आवश्यक राहत उपाय लागू करने की चुनौती होगी। सूखे की स्थिति में किसानों और ग्रामीण परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना तथा उपलब्ध संसाधनों का उचित प्रबंधन करना महत्वपूर्ण रहेगा।
आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था की स्थिति पर नजर बनी रहेगी।