नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से बाब अल-मंदेब समुद्री मार्ग पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसी बीच ईरान और खाड़ी देशों के बीच प्रस्तावित बैठक टलने तथा सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन के अस्थायी रूप से बंद होने से तेल की सप्लाई को लेकर आशंकाएं गहरा गई हैं।
टली ईरान-खाड़ी देशों की अहम बैठक
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और अन्य सामानों की आवाजाही सामान्य करने के लिए ओमान की मध्यस्थता में ईरान और खाड़ी देशों के बीच बातचीत प्रस्तावित थी। लेकिन यह बैठक फिलहाल टल गई है। माना जा रहा था कि वार्ता के जरिए समुद्री मार्ग पर तनाव कम करने और जहाजों की आवाजाही के लिए कोई व्यवस्था बनाई जा सकती है।
बैठक टलने से तत्काल कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है। अब ईरान और ओमान मिलकर बैठक की नई तारीख तय करने पर चर्चा करेंगे।
सऊदी की अहम तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला
इसी बीच सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ, जिसके बाद इसे फिलहाल बंद कर दिया गया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को रेड सी स्थित यानबू बंदरगाह से जोड़ती है।
इस पाइपलाइन की रणनीतिक अहमियत इसलिए अधिक है क्योंकि इसके जरिए सऊदी अरब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करते हुए तेल को पश्चिमी तट से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के महीनों में इस पाइपलाइन से प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था।
यानबू में मौजूद भंडार के जरिए कुछ दिनों तक निर्यात जारी रखा जा सकता है, लेकिन पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहने पर वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
बाब अल-मंदेब पर भी बढ़ा दबाव
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। हूतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इसके साथ ही रेड सी क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ाई है।
बाब अल-मंदेब रेड सी के मुहाने पर स्थित बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही के लिए इसका बड़ा महत्व है। यदि इस मार्ग पर भी लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो तेल के साथ-साथ अन्य सामानों की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
दो अहम समुद्री रास्तों पर संकट
मौजूदा स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति पर एक साथ दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का दबाव बढ़ रहा है—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब। होर्मुज के जरिए दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जबकि बाब अल-मंदेब एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
अगर दोनों मार्गों पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो जहाजों को वैकल्पिक और लंबे रास्तों से भेजना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत और डिलीवरी समय दोनों बढ़ सकते हैं।
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी इसी स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा है।
तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रही तो इसका असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है।
आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर ईंधन की लागत पर पड़ता है। ईंधन महंगा होने पर ट्रकों और अन्य परिवहन साधनों की परिचालन लागत बढ़ती है। इसका असर सप्लाई चेन के जरिए अलग-अलग उत्पादों की कीमतों तक पहुंच सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि पश्चिम एशिया में तनाव कब कम होता है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही कब सामान्य होती है और सऊदी की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन कब दोबारा शुरू होती है।
अगर तनाव लंबे समय तक बना रहा और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, तो महंगे कच्चे तेल के साथ पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।