UPSC Prelims 2026 के 27 सवालों पर विवाद अभ्यर्थियों की याचिका पर CAT ने UPSC से मांगा जवाब

नई दिल्ली। UPSC सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स 2026 के प्रश्नपत्र और प्रोविजनल आंसर की को लेकर विवाद बढ़ गया है। अभ्यर्थियों ने 27 सवालों के जवाबों और विकल्पों को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी है। उनका आरोप है कि कुछ सवालों के लिए प्रोविजनल आंसर की में गलत उत्तर दिए गए हैं, जबकि कुछ प्रश्नों में एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं या कोई विकल्प पूरी तरह सही नहीं है। CAT ने मामले में UPSC को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।

दो याचिकाओं में उठे 27 सवाल

मामले में दो अलग-अलग समूहों की याचिकाएं सामने आई हैं। पहली याचिका में चार अभ्यर्थियों ने 8 सवालों को चुनौती दी थी। दूसरी याचिका में 63 अभ्यर्थियों ने कुल 27 सवालों पर आपत्ति जताई है, जिसमें पहले से चुनौती दिए गए आठ सवाल भी शामिल हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि विवादित प्रश्नों में तथ्यात्मक त्रुटियों, गलत उत्तरों और विकल्पों की अस्पष्टता से जुड़ी समस्याएं हैं। हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले पर CAT में सुनवाई होनी बाकी है।

ग्रैंड स्लैम से लेकर जीरो FIR तक सवालों पर आपत्ति

याचिकाओं में अलग-अलग विषयों से जुड़े प्रश्नों पर आपत्तियां उठाई गई हैं। इनमें ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट, जीरो FIR, भारतीय कानूनों से जुड़े प्रावधान और ऋग्वैदिक काल से संबंधित प्रश्न शामिल हैं। अभ्यर्थियों ने कुछ प्रश्नों के उत्तरों को आधिकारिक या प्रामाणिक स्रोतों से मेल न खाने का दावा किया है।

जीरो FIR से जुड़े प्रश्न में भाषा को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हिंदी और अंग्रेजी संस्करण में इस्तेमाल किए गए शब्दों के अंतर के कारण प्रश्न की व्याख्या अलग-अलग हो सकती है।

ऋग्वैदिक काल से जुड़े सवाल भी विवाद में

अभ्यर्थियों ने ऋग्वैदिक काल और जल प्रबंधन से संबंधित कम से कम चार प्रश्नों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कुछ प्रश्नों में इस्तेमाल किए गए तथ्यों और उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों के बीच अंतर है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब परीक्षा में बेहद विशिष्ट तथ्यों के आधार पर अभ्यर्थियों का मूल्यांकन किया जाता है, तो उत्तर कुंजी में भी उसी स्तर की सटीकता होनी चाहिए |

24 मई को हुई थी UPSC Prelims परीक्षा

UPSC सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स 2026 का आयोजन 24 मई 2026 को किया गया था। आयोग ने पहली बार परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की 27 मई को जारी की थी और अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया था। UPSC ने कहा था कि प्राप्त अभ्यावेदनों को विषय विशेषज्ञों की टीम के सामने समीक्षा के लिए रखा जाएगा।

इसके बाद मामला CAT तक पहुंचा। अगस्त में आठ सवालों को लेकर पहली याचिका पर CAT ने UPSC से जवाब मांगा था। अब 27 सवालों से जुड़ी दूसरी याचिका के चलते विवाद का दायरा बढ़ गया है |

8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

CAT में दोनों मामलों की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होनी है। फिलहाल किसी प्रश्न के उत्तर को बदलने या अभ्यर्थियों के अंकों में संशोधन का कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है। UPSC को अब याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रीलिम्स में कुछ अंकों का अंतर भी महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जो कटऑफ के आसपास रहे हों। हालांकि, विवादित प्रश्नों और उनके संभावित प्रभाव पर अंतिम स्थिति CAT की सुनवाई और आगे आने वाले आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगी।

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