CGJDPA के 10 साल पूरे: स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने T1D बच्चों के साथ बैठकर किया भोजन, 20 बच्चों को बांटे ग्लूकोमीटर

रायपुर । छत्तीसगढ़ जुवेनाइल डायबिटीज पेरेंट्स एसोसिएशन (CGJDPA) ने सेवा के 10 वर्ष पूरे होने पर रविवार को श्री निरंजन धर्मशाला, वीआईपी रोड, रायपुर में शिक्षा एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस कार्यक्रम में टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को बीमारी के प्रबंधन, उपचार और दैनिक देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल शामिल हुए। उन्होंने बच्चों और उनके परिवारों से संवाद किया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और आत्मीय क्षण तब आया, जब स्वास्थ्य मंत्री ने टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया। उनकी इस पहल ने बच्चों और अभिभावकों को भावुक कर दिया।

20 बच्चों को ग्लूकोमीटर वितरित

मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और पारदर्शी स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए मुफ्त ग्लूकोमीटर सुविधा की जानकारी दी और कार्यक्रम में 20 जरूरतमंद बच्चों को ग्लूकोमीटर वितरित किए।

कार्यक्रम में कुल 125 बच्चों का पंजीयन हुआ और करीब 100 परिवारों ने सहभागिता की। परिचय सत्र में बच्चों ने स्वयं अपना परिचय दिया, जिससे कार्यक्रम में आत्मीयता और सामुदायिक भावना का माहौल बना।

बच्चों और अभिभावकों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों, उनके माता-पिता और डायबिटीज के साथ सफल जीवन जी रहे कामकाजी पेशेवरों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने शुरुआती जांच के दौरान आने वाली चुनौतियों, नियमित देखभाल और परिवार एवं समुदाय से मिलने वाले सहयोग के बारे में बताया।

डायबिटीज के साथ सफल करियर बना चुके पेशेवरों की कहानियों ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि उचित देखभाल और उपचार के साथ टाइप-1 डायबिटीज बच्चों की पढ़ाई, करियर और सामान्य जीवन में बाधा नहीं बनती।

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी जरूरी जानकारी

शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने तकनीकी सत्र लेकर परिवारों को टाइप-1 डायबिटीज के दैनिक प्रबंधन की जानकारी दी। एम्स रायपुर की डॉ. सिमरन स्याल ने इंसुलिन थेरेपी, इंसुलिन के सही भंडारण और इंजेक्शन लगाने की तकनीक समझाई।

पोषण विशेषज्ञ डॉ. शिल्पी गोयल ने कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग और संतुलित पोषण पर जानकारी दी। एम्स रायपुर की डॉ. नीलम यादव ने बीमारी के दौरान बच्चों की देखभाल और डायबिटीज के विभिन्न प्रकारों पर चर्चा की। डॉ. प्रीति सिंह ने महिलाओं और किशोरियों में डायबिटीज प्रबंधन, जबकि डॉ. संजीव कुमार ने बच्चों में मोटापे से जुड़ी समस्याओं पर जानकारी दी।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष महोबिया ने आंखों की सुरक्षा और डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचाव के उपाय बताए। डॉ. बिप्लब बंद्योपाध्याय ने किशोरावस्था में डायबिटीज के साथ जीवन जीने पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. तरुण मिश्रा ने डायबिटीज के उपचार में नई खोजों और प्रगति की जानकारी साझा की। प्रत्येक सत्र के बाद प्रश्नोत्तर का आयोजन किया गया, जिसमें अभिभावकों ने विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे।

10 वर्षों से बच्चों और परिवारों के लिए काम कर रही CGJDPA

CGJDPA पिछले करीब 10 वर्षों से छत्तीसगढ़ में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों, उनके परिवारों और समाज के लिए कार्य कर रही है। संस्था चिकित्सा एवं इंसुलिन सहायता के साथ परिवारों को मानसिक, सामाजिक और व्यावहारिक सहयोग भी उपलब्ध कराती है।

आयोजन का उद्देश्य यह संदेश देना था कि उचित चिकित्सा, नियमित इंसुलिन, आवश्यक जांच, संतुलित पोषण, शिक्षा और सामाजिक सहयोग के माध्यम से टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चे भी सामान्य, स्वस्थ और सार्थक जीवन जी सकते हैं। संस्था ने छत्तीसगढ़ में बाल मधुमेह के लिए संवेदनशील और प्रभावी स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने की दिशा में सरकार से सहयोग की अपेक्षा भी व्यक्त की।

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