त्रिशूर | ATM से पैसे निकालने की कोशिश में अगर कैश न निकले, लेकिन खाते से रकम कट जाए, तो बैंक की जिम्मेदारी सिर्फ शिकायत दर्ज करने तक खत्म नहीं होती. केरल के त्रिशूर जिला कंज्यूमर कमीशन ने ऐसे ही एक मामले में बैंक को ग्राहक को 70 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है.
मामला करीब 12 साल पुराना है. साल 2014 में एक ग्राहक ने दूसरे बैंक के ATM से 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की थी. ATM से कैश नहीं निकला, लेकिन ट्रांजैक्शन सफल दिखा और ग्राहक के खाते से 10 हजार रुपये कट गए.
ATM से कैश नहीं मिला, खाते से पैसे कट गए
मामला 1 मार्च 2014 का है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने दूसरे बैंक के ATM से 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की थी. मशीन से पैसे नहीं निकले, लेकिन उनके बैंक खाते से 10 हजार रुपये डेबिट हो गए.
ग्राहक ने इसकी शिकायत अपने बैंक से की. हालांकि, काफी समय बीतने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. साल 2015 में ग्राहक ने बैंक को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन इसके बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली. आखिरकार उन्होंने कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया.
बैंक ने कहा- ATM से निकले थे पैसे
सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से दावा किया गया कि ATM ट्रांजैक्शन की जांच की गई थी और इसे सफल पाया गया था. बैंक का कहना था कि संबंधित ट्रांजैक्शन के जरिए ग्राहक को 10 हजार रुपये मिल गए थे.
लेकिन कमीशन के सामने बैंक इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया.
ATM के रिकॉर्ड में भी नहीं मिला ट्रांजैक्शन का डेटा
मामले की जांच के दौरान कमीशन ने पाया कि ATM के रिकॉर्ड में संबंधित ट्रांजैक्शन का कोई डेटा मौजूद नहीं था. कमीशन ने कहा कि बैंक यह साबित करने में भी नाकाम रहा कि शिकायतकर्ता को वास्तव में 10 हजार रुपये कैश मिले थे.
कमीशन ने यह भी कहा कि ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह खुद जाकर दूसरे बैंक के ATM की तकनीकी खराबी साबित करे. शिकायत मिलने के बाद ग्राहक के खाते वाले बैंक की जिम्मेदारी थी कि वह मामले की जांच कर समस्या का समाधान करता.
शिकायत सुलझाने में देरी पर भी नाराजगी
31 अगस्त को अध्यक्ष CT साबू, श्रीजा एस और राम मोहन आर की बेंच ने मामले की सुनवाई की. कमीशन ने माना कि बैंक की ओर से सेवा में कमी हुई और ग्राहक की शिकायत को समय पर सुलझाने में भी गंभीर देरी हुई.
कमीशन के मुताबिक, बैंक ने ठोस सबूत के बिना ही ग्राहक की शिकायत को खारिज कर दिया. इससे ग्राहक को मानसिक परेशानी, असुविधा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
मांगे थे 10 हजार, मिले 70 हजार
दिलचस्प बात यह है कि शिकायतकर्ता ने मुआवजे के तौर पर सिर्फ 10 हजार रुपये की मांग की थी. लेकिन कमीशन ने कहा कि मामले को सुलझाने में हुई देरी, सेवा में कमी, मानसिक परेशानी और कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च को देखते हुए ज्यादा मुआवजा दिया जाना चाहिए.
कमीशन ने बैंक को आदेश दिया कि वह एक महीने के भीतर ग्राहक को कुल 70 हजार रुपये का मुआवजा दे.
इस रकम में ग्राहक को हुए आर्थिक नुकसान, परेशानी और कानूनी कार्रवाई में हुए खर्च को ध्यान में रखा गया है.
इस मामले से साफ है कि ATM ट्रांजैक्शन में विवाद होने पर बैंक सिर्फ ट्रांजैक्शन को ‘सक्सेसफुल’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता. अगर ग्राहक को कैश नहीं मिला है, तो बैंक को संबंधित रिकॉर्ड और सबूतों के आधार पर मामले की जांच करनी होगी.