सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने शनिवार, 5 सितंबर तड़के ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार से सौहार्द बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी धर्मों के लोगों और उनके पूजा स्थलों को समान सम्मान और सुरक्षा मिले। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद समेत प्रदेश में ऐसी कार्रवाइयों को रोकने की मांग करते हुए विवादों के समाधान के लिए अन्य तरीकों पर विचार करने की बात कही।
मस्जिद को लेकर डेढ़ साल से चल रहा था विवाद
मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद से जुड़ा है। करीब डेढ़ साल पहले बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय समन्वयक विकास त्यागी ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण अवैध तरीके से किया गया है। शिकायत में परिसर के व्यावसायिक इस्तेमाल और कुछ कमरों को किराए पर दिए जाने का भी आरोप लगाया गया था।
मस्जिद कमेटी ने जमीन को वक्फ संपत्ति बताते हुए मस्जिद को करीब 150 साल पुराना होने का दावा किया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अदालत में इस दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके।
अदालत के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने विवादित जमीन को सरकारी भूमि माना और मस्जिद के निर्माण को अवैध ठहराया। आदेश में संबंधित पक्षों पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने तथा परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया।
इसके खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में अपील की। 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने परिसर खाली कराने और मस्जिद हटाने की कार्रवाई शुरू की।
नेताओं ने कार्रवाई को लेकर जताई चिंता
कार्रवाई से पहले शुक्रवार रात कलेक्ट्रेट के बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेता मौके पर पहुंचे थे। नेताओं को कलेक्ट्रेट गेट पर रोक दिया गया, हालांकि बाद में जिलाधिकारी अरविंद चौहान से उनकी मुलाकात हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन शनिवार तड़के मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
भारी पुलिस बल और आरएएफ तैनात
कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सुरक्षा के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की पांच कंपनियां भी लगाई गईं। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि त्योहारों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाह और फर्जी खबरें फैलाने वालों को भी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।