रायपुर | छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भगवान श्री बलराम दिवस को प्रदेश में ‘किसान दिवस’ के रूप में मनाए जाने के ऐतिहासिक निर्णय के तहत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के स्वामी विवेकानंद सभागार में एक राज्य स्तरीय कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “छत्तीसगढ़ में दलहन, तिलहन एवं प्राकृतिक खेती” था, जिसमें राज्यभर के किसानों और वैज्ञानिकों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु और गणमान्य अतिथि
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संयुक्त तत्वावधान: यह आयोजन कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (रायपुर), दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय (दुर्ग) और महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (दुर्ग) के सहयोग से संपन्न हुआ।
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मुख्य अतिथि: कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे।
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विशेष उपस्थिति: कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल, डॉ. आर.आर.बी. सिंह, डॉ. रवि रतन सक्सेना, संचालक कृषि श्री राहुल देव, और छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कृषि मंत्री और अन्य वक्ताओं के प्रमुख विचार
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प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन: कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों का दुरुपयोग नदियां और नाले सुखाने का कारण बन रहा है।
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दलहन-तिलहन पर प्रोत्साहन राशि: संचालक कृषि श्री राहुल देव ने घोषणा की कि धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री दलहन-तिलहन अभियान के तहत 1,500 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी दी गई।
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प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल ने किसानों को केवल जानकारी देने के बजाय प्राकृतिक और जैविक खेती की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर बल दिया।
तकनीकी सत्र और कार्यशालाएं
संगोष्ठी के दौरान दो विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें गोपालन, जैविक खाद निर्माण, खरपतवार नियंत्रण, प्रमाणीकरण और उपज की मार्केटिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों (डॉ. दीपक चंद्राकर, डॉ. नंदन मेहता, श्री आम प्रकाश सेन आदि) द्वारा किसानों को प्रशिक्षित किया गया। कार्यक्रम में डीडी किसान द्वारा तैयार डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया।