‘राष्ट्रविरोधी ताकतें न उठाएं फायदा’: जानिए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की असली वजह और 10 बड़ी बातें

नई दिल्ली | NEET-UG परीक्षा विवाद, जंतर-मंतर पर लगातार जारी विरोध और देशव्यापी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। शनिवार दोपहर लगभग 02:30 बजे उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा और सोशल मीडिया (X) पर दो पन्नों की अपनी चिट्ठी साझा की।

शिक्षा मंत्री का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक फैल चुका था। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पिछले 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे।

इस्तीफे की ‘असली’ वजह: ‘राष्ट्रविरोधी ताकतें न उठाएं फायदा’

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने दो पन्नों के पत्र में साफ किया कि जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में बन रहे माहौल से वे बेहद दुखी थे। उन्होंने पद छोड़ने का मुख्य कारण बताते हुए लिखा:

“जंतर-मंतर और देश में बनी स्थिति का राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और कोई भी छात्र कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। छात्र अपना समय राजनीति या विवादों में नहीं, बल्कि पढ़ाई और करियर बनाने में लगाएं।”

धर्मेंद्र प्रधान की चिट्ठी की 10 बड़ी बातें

  1. 10 दिनों के घटनाक्रम से व्यथित: पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने मन को अत्यंत दुखी किया है। यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है।

  2. युवा शक्ति की सुरक्षा: भारत की युवा शक्ति ही देश की असली ताकत है। उसे किसी भी भ्रम या षड्यंत्र के जाल में फंसने नहीं दिया जाएगा।

  3. CBI जांच और Re-Test: 3 मई 2026 की NEET-UG परीक्षा में अनियमितता की शिकायत आते ही तुरंत CBI जांच कराई गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई।

  4. CBT मोड में होगी अगली परीक्षा: पारदर्शी व्यवस्था के लिए अगले साल से NEET-UG परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी।

  5. ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण: 20 लाख से अधिक छात्रों की निष्पक्ष परीक्षा के लिए केंद्र, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों ने मिलकर काम किया।

  6. परीक्षा माफिया के खिलाफ संकल्प: पहले दिन से इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी ली, ताकि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण खराब न हो।

  7. 16 जुलाई के परिणाम संतोषजनक: री-टेस्ट के परिणामों में गरीब और वंचित पृष्ठभूमि के कई मेधावी छात्रों को सफलता मिली।

  8. गुमराह करने की कोशिशों से दुख: परिणाम घोषित होने के बाद भी जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे मन आघात पहुंचा।

  9. देश की एकता और शांति प्राथमिकता: जंतर-मंतर और देश में उपजे असंतोष का कोई राष्ट्रविरोधी तत्व अनुचित लाभ न उठाए, इसलिए इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

  10. प्रधानमंत्री से अपील: प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया कि देश में ऐसा माहौल बनाया जाए जिससे छात्र बेफिक्र होकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

जंतर-मंतर से लेकर राज्यों तक फैला आंदोलन

धर्मेंद्र प्रधान का यह कदम चौतरफा बने दबाव का परिणाम माना जा रहा है:

  • सोनम वांगचुक का अनशन: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक छात्रों की मांगों के समर्थन में पिछले 26 दिनों से अनवरत भूख हड़ताल पर थे।

  • देशव्यापी विरोध: 25 जुलाई को बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे।

  • राजनीतिक दबाव: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन के राष्ट्रव्यापी रूप लेने के बाद सरकार को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।

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