अहिल्यानगर। NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मौन आंदोलन किया। इस दौरान वह भावुक हो गए और फफक-फफक कर रो पड़े। तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद अन्ना हजारे छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए।
अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मौन आंदोलन किया। इसके बाद वह अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए। प्रदर्शन के दौरान उनकी भावुक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
बताया गया कि अन्ना हजारे स्वास्थ्य कारणों से ज्यादा देर तक प्रदर्शन स्थल पर नहीं रुक सके, लेकिन उन्होंने छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया। उनके जाने के बाद भी छात्रों और समर्थकों का मौन आंदोलन जारी रहा।
PM मोदी को लिखा था पत्र
इससे पहले अन्ना हजारे ने छात्रों के मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने NEET पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में देरी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई थी।
अन्ना ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और हिंसा की घटनाओं को दुखद बताते हुए कहा था कि छात्रों की नाराजगी को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज की पीड़ा और युवाओं की उम्मीदों से जोड़कर समझना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की जा रही है, तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली में जवाबदेही और सुधार आएगा।
हिंसा से बचने की अपील
गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे ने लोकतांत्रिक आंदोलनों में हिंसा, सरकारी संपत्तियों को नुकसान और अत्यधिक बल प्रयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा परीक्षा में पारदर्शिता, पेपर लीक और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंतित हैं, जिनका समाधान संवाद और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।