एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन बोले—मजबूत इच्छाशक्ति से समाप्त हुआ नक्सलवाद, छत्तीसगढ़ प्रगति के नए युग की ओर अग्रसर

रायपुर |  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खतरे को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के बल पर समाप्त किया गया है। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ अपने अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के एक नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। इस ऐतिहासिक परिवर्तन का श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया।

376 महिलाओं और 313 पुरुषों को मिली डिग्री समारोह में विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों के कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिनमें 376 महिलाएं और 313 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा, उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 16 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में उपस्थित राज्यपाल श्री रमेन डेका ने युवा चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ-साथ करुणा, नैतिक मूल्यों और धैर्य को अपनाएं, क्योंकि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एम्स रायपुर की बड़ी भूमिका उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद से इस संस्थान ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा की क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने संस्थान की उन्नत चिकित्सा उपलब्धियों जैसे—पहला किडनी प्रत्यारोपण (95% से अधिक सफलता दर), कॉर्नियल व कान प्रत्यारोपण और आगामी हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की सराहना की।

समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी नव-स्नातक चिकित्सकों और उपस्थित लोगों को ‘नशे को ना कहें’ की शपथ भी दिलाई गई।

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