कोलकाता। कोलकाता नगर निगम (KMC) चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए करीब 20 सांसदों के गुट NCPI की ओर से BJP के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के दावे के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने किसी भी गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। BJP के इस रुख से दोनों दलों के बीच संभावित चुनावी तालमेल को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।
NCPI ने किया था BJP के साथ चुनाव लड़ने का दावा
NCPI सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने दावा किया था कि उनकी पार्टी NDA के घटक के तौर पर BJP के साथ मिलकर KMC चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि इस संबंध में BJP के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत हो चुकी है और गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
हालांकि, BJP की ओर से सामने आए बयान ने इस दावे पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
BJP बोली- पश्चिम बंगाल में कोई सहयोगी नहीं
KMC चुनाव प्रभारी और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में BJP का फिलहाल कोई सहयोगी नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी नगर निगम चुनाव में अपने दम पर उतरने की तैयारी कर रही है।
मजूमदार के मुताबिक, उन्हें NCPI के साथ गठबंधन का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अंतिम आधिकारिक बयान प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य या नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की ओर से आएगा।
बागी TMC नेताओं के साथ गठबंधन पर BJP में भी सवाल
संभावित गठबंधन को लेकर BJP के भीतर भी कथित तौर पर असहजता है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि जिन नेताओं के खिलाफ BJP लंबे समय से TMC सरकार और उसके कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक लड़ाई लड़ती रही है, उन्हीं के साथ चुनावी गठबंधन करना पार्टी की रणनीति और संदेश पर सवाल खड़े कर सकता है।
ऐसे में BJP के लिए NCPI के साथ तालमेल करना आसान नजर नहीं आ रहा है।
संसद की राजनीति पर भी पड़ सकता है असर
KMC चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच बढ़ती दूरी का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। करीब 20 बागी TMC सांसदों का यह गुट संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
ऐसे में यदि चुनावी गठबंधन को लेकर मतभेद बढ़ते हैं तो लोकसभा और राज्यसभा में BJP की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस गुट को साधने के लिए केंद्र की ओर से संभावित राजनीतिक समझौते की चर्चाएं भी चल रही हैं।
दिसंबर तक KMC चुनाव की संभावना
कोलकाता नगर निगम चुनाव दिसंबर 2026 तक होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, KMC में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा है।
ऐसे में आगामी चुनाव NCPI के लिए पश्चिम बंगाल में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करने की बड़ी परीक्षा बन सकता है, जबकि BJP के अकेले चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।