जांजगीर | नागपंचमी के अवसर पर जांजगीर में आस्था और लोकपरंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। जिला मुख्यालय की पुरानी बस्ती में वर्षों से चली आ रही ‘नगमत’ परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने कीचड़ में लोटकर नागदेव के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट की।
नगमत आयोजन के लिए पहले मैदान में गीली मिट्टी और कीचड़ तैयार किया गया। इसके बाद मांदर और झांझ की थाप के बीच धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुआ। अग्नि प्रज्ज्वलित कर हवन और मंत्रोच्चार किया गया। पूजा-अर्चना के बाद कुछ श्रद्धालु नाग जैसी मुद्रा में कीचड़ में लोटने लगे।
पूजा और मंत्रोच्चार के बाद पूरी हुई रस्म
मान्यता के अनुसार नगमत के दौरान श्रद्धालु नागदेव के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। आयोजन में बैगा द्वारा विशेष पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार किया गया। पूजा एवं पारंपरिक रस्मों के बाद श्रद्धालुओं ने कीचड़ में लोटकर इस अनूठी परंपरा को निभाया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार नगमत की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और आज भी नागपंचमी के अवसर पर इसे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता है।
शोभायात्रा के साथ भीमा तालाब पहुंचे श्रद्धालु
नागदेव की पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा निकाली गई। मांदर की थाप के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीमा तालाब पहुंचे, जहां पूजन सामग्री का विधिवत विसर्जन किया गया। इस दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
कैथा के बिरतिया बाबा मंदिर में भी उमड़ा आस्था का सैलाब
नागपंचमी के अवसर पर कैथा गांव स्थित प्रसिद्ध बिरतिया बाबा मंदिर में भी भव्य मेले का आयोजन हुआ। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी और दिनभर पूजा-अर्चना एवं दर्शन का सिलसिला चलता रहा।
मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें भी लगाई गईं, जहां लोगों ने खरीदारी की। शाम तक मंदिर परिसर और मेला स्थल श्रद्धालुओं से गुलजार रहा।
नागपंचमी के इन आयोजनों ने जांजगीर क्षेत्र की धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी प्रस्तुत की।