तिल्दा-नेवरा. इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य के महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके की गरिमामई उपस्थिति रही.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में पंचमी अनुसूची के तहत आदिवासी अधिकारों के लिए बनाये गया कानून “पेसा” का प्रभावी क्रियान्वयन हो, प्रदेश के आदिवासी समाज से उनकी जमीन विकास के नाम पर न छिनी जाय, अहिंसात्मक विचारधारा पर काम करने वाले स्वयं सेवी संगठनों के साथ निरंतर संवाद बनी रहे, ताकि समाज में शांति बनी रहे.
एकता परिषद् के संस्थापक श्री राजगोपाल जी ने कहा कि देश में न्याय प्रकिया दुरुस्त हो जाने से अपने आप शांति स्थापित हो जायेगा. एकता परिषद् आदिवासी, दलित तथा गरीब परिवार के भूमि अधिकार की बात कहती है और सरकार से भूमि सुधार पर काम करने के लिए कहती है. उन्होंने कहा कि भूमि सुधार की बात करने पर सरकार द्वारा जमीन की अन-उपलब्धता की बात कहती है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन जो दबंगों ने अपने कब्ज़ा में कर लिया है, उसे मुक्त कर दिलाया जाय, जिस जमीन पर वे स्वयं काबिज हैं, उनका अधिकार पत्र दे, ताकि कभी विस्थापन से बच सके. सरकार को अलग से जमीन तलाशने की जरूरत नहीं है.
उक्त कार्यक्रम को सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष श्री चन्दन पाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अरविन्द नेताम, सर्व आदिवासी सभा के अध्यक्ष श्री सोहन पोटाई, स्वाभिमान मंच के संयोजक श्री बसवराज तथा एकता परिषद् के अध्यक्ष श्री रनसिंह द्वारा सभा को संबोधित किया गया .
इस कार्यक्रम का आयोजन न्याय और शांति पदयात्रा के समापन अवसर पर किया गया जो देश भर के 17 राज्यों के 100 जिलों में विश्व शांति दिवस 21 सितम्बर को प्रारंभ होकर विश्व अहिंसा दिवस 2 अक्टूबर तक चलाया गया, जिसमे छत्तीसगढ़ राज्य के 17 जिलों में भी यह यात्रा आयोजित किया गया. कार्यक्रम का संचालन एकता परिषद के महासचिव रमेश शर्मा ने किया
इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य के 19 जिलों से लगभग 350 पदयात्री शामिल हुए