*〽️बोरे बासी छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परंपरा की है दशकों पुरानी पहचान– एडवोकेट गिरधर जायसवाल*
*एक मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस पर बोरे बासी खाकर एडवोकेट गिरधर ने श्रम दिवस पर श्रमिक भाइयों को दी गिरधर ने
वर्तमान भागमभाग की जिंदगी में हम अपने खानपान को करते जा रहे अनियंत्रित, हमें देना होगा अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान– गिरधर
सक्ति-छत्तीसगढ़ प्रदेश में दशकों से यहां की संस्कृति एवं परंपरा की पहचान बोरे बासी रहा है, तथा हम सभी को छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं लोक परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए, साथ ही छत्तीसगढ़ शासन ने भी छत्तीसगढ़ के विशेष पर्वों के लिए शासकीय अवकाश घोषित किए जाने की पहल की है, जो कि सराहनीय है, उक्तआशय की बातें शक्ति विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एडवोकेट गिरधर जायसवाल ने 1 मई को कहीं
एडवोकेट गिरधर जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय मजदूर श्रम दिवस पर भी सभी श्रमिक भाइयों /बहनों को नमन, वंदन करते हुए कहा कि आज उनकी मेहनत से हमारा प्रदेश विकास की ओर अग्रसर हो रहा है, तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 1 मई को मजदूर दिवस को बोरे बासी के रूप में सांस्कृतिक परंपराओं को महत्व देने के दृष्टिकोण से सभी को बोरे बासी खाने की अपील की है, जो कि बहुत ही सराहनीय पहल है, एडवोकेट गिरधर जायसवाल के अनुसार चावल को 1 दिन पूर्व रात्रि के समय पानी में भिगोकर रखा जाता है, तथा सुबह उसे पूरी तरह से भीग जाने पर भाजी, टमाटर, चटनी, मिर्ची की चटनी, प्याज, बड़ी-बिजोरी एवं आम, नींबू अचार के साथ बड़े ही आनंद के साथ खाया जाता है, जो कि शरीर और हमारे स्वास्थ्य को भी अच्छा रखता है, तो वहीं इसमें विटामिन बी की भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होने के साथ-साथ शरीर में रक्तचाप एवं हाइपरटेंशन इत्यादि को भी यह नियंत्रित रखता है, एडवोकेट गिरधर जायसवाल ने कहा कि बोरे बासी में आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम की मात्रा काफी होती है ,तथा इसे खाने से पाचन क्रिया भी हमारी अच्छी रहती है एवं शरीर में ठंडक ता रहती है
तथा छत्तीसगढ़ के मेहनतकश किसान- मजदूर भाइयों के साथ साथ सभी वर्ग के लोगों को बोरे बासी का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए, जायसवाल के अनुसार वर्तमान की इस आधुनिकता भरी दौड़ में हम जागरूकता के अभाव में अपने खानपान को अनियंत्रित करते जा रहे हैं, जिसके चलते आज शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियां घर कर रही हैं,एवं आज तरह-तरह की बीमारियों से लोग ग्रसित हैं, हमें हमारी पुरानी संस्कृति और परंपरा के अनुरूप अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए छत्तीसगढ़ी खानपान का भी प्रचार कर इसके संरक्षण की दृष्टि से भी अपना कार्य करना चाहिए, वही 1 मई को एडवोकेट गिरधर जायसवाल ने अपने पूरे परिवार के साथ घर पर ही मुख्यमंत्री के आव्हान पर बोरे बासी खाकर इसे मनाया