देश में आज से ठीक दो साल पहले पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था। कोरोना वायरस से बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में लॉकडाउन लगाने का ऐलान करते हुए कहां कि 24 मार्च की आधी रात से देश में 21 दिन का पूर्ण लॉकडाउन लगाया जाएगा।
पहली बार जब लॉकडाउन का ऐलान किया गया तो ऐसा लगा कि शायद 21 दिनों में देश कोरोना पर विजय हासिल कर लेगा और जीवन फिर से सामान्य हो जाएगा लेकिन अब भी कोरोना पूरी तरह से देश से गया नहीं है। महामारी को दो साल पूरे हो गए हैं, फिर भी पहले की तरह सब सामान्य नहीं हो पाया है। इस महामारी ने कितने ही लोगों की जान ले ली, न जाने कितने बच्चे अनाथ हो गए और न जाने कितने लोग सड़क पर आ गए।
वहीं कोरोना की तीन लहरों ने भारत में भी लाखों लोगों की जान ले ली। दूसरी लहर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुई जब कोरोना का डेल्टा वेरिएंट देश को चपेट में ले रहा था। अस्पतालों के बाहर तड़पते मरीज, ऑक्सीजन के लिए मारामारी, प्रशासन की लाचारी, श्मशान में जलती चिताएं और लाशों से पटे घाट, महामारी की भयावहता की गवाही दे रहे थे। यह समय था जब बड़े से बड़ा आदमी लाचार था और सरकार में बैठे लोग भी घुटने टेक चुके थे।
पहली लहर की शुरुआत 3 मार्च 2020 से हुई थी और 16 सितंबर 2020 को पीक पर पहुंची थी। यानी इस लहर को पीक प र पहुंचने में करीब 200 दिन का समय लग गया। इसी लहर में सबसे ज्यादा पलायन हुआ। इस लहर में दूसरी लहर के मुकाबले मौतें कम हुईं लेकिन लोगों के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो गया। न जाने कितने ही लोग परिवार के साथ बोरिया बिस्तर समेटकर पैदल ही सड़कों पर निकल पड़े।