बेंगलुरु । कर्नाटक में दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं और विपक्षी दलों के विरोध के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सरकार के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि कीमतों में संशोधन से राज्य की ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, दूध और दही की बढ़ी हुई कीमतों से डेयरी क्षेत्र में सालाना करीब 1,850 करोड़ रुपये से लेकर 2,100 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त राशि आएगी। इससे राज्य के लगभग 28.84 लाख दुग्ध उत्पादक किसानों को फायदा होगा।
सरकार द्वारा घोषित नई दरें 1 नवंबर से लागू होंगी। इसके तहत दूध की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर और दही की कीमत में 14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के बाद नंदिनी टोन्ड दूध की कीमत 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य डेयरी कारोबार से जुड़े किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। दूध उत्पादकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना जरूरी है।
हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी के फैसले से आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस निर्णय की आलोचना की है।
अब एक नवंबर से नई दरें लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के साथ आम उपभोक्ताओं की चिंताओं का किस तरह समाधान करती है।