कोलकाता । भूटान में हिमनद झील (ग्लेशियर लेक) फटने के बाद उत्तर बंगाल में संभावित बाढ़ और तबाही का खतरा समय रहते उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण टल गया है। जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार के प्रभावित इलाकों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने लोगों को आश्वस्त किया कि फिलहाल घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि शुरुआती जानकारी में जिन 47 लोगों के लापता होने की आशंका जताई गई थी, उन सभी का पता लगा लिया गया है और वे सुरक्षित हैं।
समय पर चेतावनी से बची बड़ी तबाही
मुख्यमंत्री के अनुसार, भूटान में ग्लेशियर झील फटने की घटना के बाद संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल सतर्कता बरती। समय रहते चेतावनी और एहतियाती कदम उठाए जाने से उत्तर बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी आपदा को टालने में मदद मिली।
जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में स्थिति सामान्य
ग्लेशियर झील फटने की घटना के बाद जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार के कुछ इलाकों में चिंता की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्रों में हालात अब नियंत्रण में हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
47 लापता लोगों का चला पता
मुख्यमंत्री ने राहत की जानकारी देते हुए कहा कि शुरुआत में 47 लोगों के लापता होने की आशंका व्यक्त की गई थी। प्रशासन की कार्रवाई के बाद इन सभी का पता लगा लिया गया है। सभी लोग सुरक्षित हैं। इससे राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी एजेंसियों को भी बड़ी राहत मिली है।
प्रशासन सतर्क, लोगों से घबराने की अपील नहीं
मुख्यमंत्री ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
भूटान में ग्लेशियर झील फटने की घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे और समय पर चेतावनी व्यवस्था की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है। समय रहते की गई सतर्कता उत्तर बंगाल में संभावित बड़े नुकसान को रोकने में महत्वपूर्ण साबित हुई है।