आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच ने सौंपा ज्ञापन, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर किरंदुल में प्रदर्शन

किरंदुल। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की लंबित मांगों के निराकरण को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच ने आवाज बुलंद की है। मंच के नेतृत्व में किरंदुल के बंगाली कैंप स्थित कला मंच में एक दिवसीय हड़ताल कर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विभागीय सचिव के नाम पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।

मंच ने प्रदेश की करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। ज्ञापन एसडीएम/कलेक्टर के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

रुक्मिणी सज्जन और रानी राव के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच, छत्तीसगढ़ की प्रांताध्यक्ष रुक्मिणी सज्जन एवं दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष रानी राव के नेतृत्व में परियोजना स्तर पर ज्ञापन सौंपने की कार्रवाई की गई। किरंदुल में आयोजित प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।

इस दौरान परियोजना अध्यक्ष अनीता मांडवी, उपाध्यक्ष लक्ष्मी ओयामी, महामंत्री शिवानी देवनाथ, मीडिया प्रभारी गीता देवनाथ, सेक्टर अध्यक्ष सुजाता गुप्ता सहित संगीता मांडवी, रिंकू, शिरीन, सुमित्रा, भारती और शांति समेत अन्य कार्यकर्ता-सहायिकाएं मौजूद रहीं।

पांच सूत्रीय मांगों में नियमितीकरण और मानदेय वृद्धि प्रमुख

मंच ने ज्ञापन के माध्यम से शासन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

मंच की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

  1. नियमितीकरण और मानदेय: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को नियमित किया जाए। नियमितीकरण होने तक कार्यकर्ताओं को 30,000 रुपये और सहायिकाओं को 25,500 रुपये मासिक मानदेय दिया जाए।
  2. पदोन्नति में अवसर: कार्यकर्ता के सेवानिवृत्त होने पर सहायिका को कार्यकर्ता के पद पर सीधी पदोन्नति दी जाए तथा इसके लिए उम्र संबंधी बाध्यता समाप्त की जाए।
  3. सामाजिक सुरक्षा: कार्यकर्ता-सहायिकाओं को समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
  4. मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सहायता: असामयिक मृत्यु की स्थिति में तत्काल अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था की जाए। साथ ही, सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को पांच लाख रुपये और सहायिका को तीन लाख रुपये का लाभ दिया जाए।
  5. मानदेय में वार्षिक वृद्धि: मध्यप्रदेश की तर्ज पर कार्यकर्ता-सहायिकाओं के मानदेय में प्रतिवर्ष एक हजार रुपये की वृद्धि की जाए।

पांच साल से सुविधाएं नहीं मिलने का लगाया आरोप

मंच का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में कई व्यावहारिक समस्याएं हैं। कार्यकर्ता-सहायिकाओं को केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली आवश्यक सुविधाएं एवं लाभ पिछले पांच वर्षों से भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कार्यकर्ताओं के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन और विभागीय जिम्मेदारियों के अलावा उनसे कई अन्य कार्य भी कराए जाते हैं। इससे मूल विभागीय कार्य प्रभावित होते हैं और काम का दबाव बढ़ता है।

मांगों के निराकरण की मांग

संयुक्त मंच ने शासन से पांचों मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निराकरण करने की अपील की है। मंच का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उनके मानदेय, सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।

अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इन मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *