NSDC ने NSE के सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पहली बार ZCZP जारी कर जुटाए 4 करोड़ रुपये, नाबार्ड ने दिया योगदान

मुंबई। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर पहली बार शून्य कूपन शून्य मूलधन (ZCZP) साधन जारी कर चार करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह राशि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने कौशल विकास और वैश्विक रोजगार के अवसरों पर केंद्रित एक नई पहल के लिए उपलब्ध कराई है।

इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर एनएसडीसी की शुरुआत के मौके पर घंटी बजाई। इस पहल को कौशल विकास के क्षेत्र में वित्तीय सहयोग बढ़ाने और सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं को समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर रहेगा जोर

एनएसडीसी की इस पहल का उद्देश्य कौशल विकास को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए वैश्विक रोजगार के अवसरों को मजबूत करना है। नाबार्ड की ओर से दिया गया चार करोड़ रुपये का योगदान इस उद्देश्य से जुड़ी नई पहल को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

कौशल आधारित प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रयासों से युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और कौशल विकास के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित करने में सहायता मिल सकती है।

क्या है सोशल स्टॉक एक्सचेंज?

सोशल स्टॉक एक्सचेंज शेयर बाजार से जुड़ा ऐसा मंच है, जिसका उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले पात्र संगठनों को वित्त जुटाने का अवसर उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से सामाजिक उद्देश्यों वाली परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

एनएसडीसी की सूचीबद्धता इस मंच के जरिए कौशल विकास जैसे सामाजिक महत्व के क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहयोग जुटाने की संभावनाओं को रेखांकित करती है।

क्या होता है जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल साधन?

जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) साधन सामाजिक क्षेत्र की पात्र संस्थाओं द्वारा धन जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक वित्तीय माध्यम है। सामान्य बॉन्ड की तरह इसमें निवेशक को ब्याज और मूलधन की नियमित वापसी का वादा नहीं होता। इसके जरिए जुटाई गई राशि निर्धारित सामाजिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती है।

एनएसडीसी और नाबार्ड की यह पहल कौशल विकास तथा रोजगार से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयासों का हिस्सा है।

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