चुनाव आयोग के अधिकारी पर मनमाने फैसले लेने का आरोप, RTI से खुलासा—दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव से की थी शिकायत

नई दिल्ली । भारतीय निर्वाचन आयोग के अधिकारी मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर नया विवाद सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर गर्ग के कामकाज पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय ने इन शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय ने अपने जवाब में कहा कि इन शिकायतों को निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक शिकायत नहीं माना गया। साथ ही, इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझा गया, क्योंकि इसे एक संवैधानिक संस्था के कामकाज में दखल के रूप में देखा जा सकता था। यह जानकारी RTI कार्यकर्ता लोकेश के. बत्रा को उपलब्ध कराई गई।

बिना चर्चा आदेश जारी करने का आरोप

मनीष गर्ग पर आरोप है कि उन्होंने निर्वाचन आयोग या संबंधित अधिकारियों के साथ पर्याप्त चर्चा किए बिना ऐसा आदेश जारी किया, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यों के बंटवारे में बदलाव हो सकता था। इस फैसले को लेकर आयोग के भीतर असहमति सामने आई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 30 जुलाई को गर्ग के कार्य-विभाजन से संबंधित आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही, निर्देश दिया गया कि जब तक आयोग में बदलाव को लेकर सहमति नहीं बन जाती, तब तक पुरानी व्यवस्था जारी रखी जाए।

कैबिनेट सचिवालय ने क्यों नहीं की कार्रवाई?

RTI से सामने आई जानकारी के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने शिकायतों पर सीधे कार्रवाई करने के बजाय निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता को ध्यान में रखा। सचिवालय का रुख था कि आयोग की ओर से आधिकारिक शिकायत नहीं होने की स्थिति में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

इस घटनाक्रम ने निर्वाचन आयोग के आंतरिक प्रशासन, अधिकारियों के बीच कार्य-विभाजन और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।

कौन हैं मनीष गर्ग?

मनीष गर्ग 1996 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति ने उन्हें निर्वाचन आयोग में उप निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को पदभार संभाला था। इससे पहले वे हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।

निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस मामले में RTI के जरिए सामने आई जानकारी ने आयोग के प्रशासनिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर बहस को तेज कर दिया है। एक ओर अधिकारियों के बीच कार्य-विभाजन को लेकर असहमति सामने आई, वहीं दूसरी ओर कैबिनेट सचिवालय ने संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप से बचने का रुख अपनाया।

हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों और शिकायतों के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों और निर्वाचन आयोग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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