करवा चौथ पर करवा की टोंटी में क्यों लगाई जाती हैं सींकें? जानिए पौराणिक कथा और 28 सींकों का महत्व

धर्म डेस्क। करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं। दिनभर उपवास करने के बाद महिलाएं शाम को विधि-विधान से करवा माता की पूजा करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के करवे, छलनी, दीपक, चावल और सुहाग की सामग्री के साथ सींकों का भी विशेष महत्व माना जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि पूजा के दौरान करवा की टोंटी में सींकें लगाई जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा जुड़ी हुई है?

करवा की टोंटी में सींकें लगाने के पीछे क्या है मान्यता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ की पूजा में सींकें करवा माता की शक्ति, साहस और अपने पति की रक्षा के संकल्प का प्रतीक मानी जाती हैं। लोक परंपरा में इन सींकों को पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से भी जोड़कर देखा जाता है।

मान्यता है कि पूजा के दौरान करवे की टोंटी में सींकें लगाने से करवा माता की कथा का स्मरण होता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि तथा सींकों के इस्तेमाल की परंपरा में अंतर हो सकता है।

क्या है करवा माता और मगरमच्छ की पौराणिक कथा?

प्रचलित लोककथा के अनुसार, एक बार करवा माता के पति नदी में स्नान कर रहे थे। उसी दौरान एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। पति को संकट में देखकर करवा माता ने अपनी शक्ति और पतिव्रत धर्म के प्रभाव से मगरमच्छ को बांध दिया।

इसके बाद वह यमराज के पास पहुंचीं और अपने पति के प्राणों की रक्षा करने की प्रार्थना की। कथा के एक प्रचलित रूप में बताया जाता है कि उस समय चित्रगुप्त जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा लिख रहे थे।

करवा माता ने अपने संकल्प और साहस के बल पर पति की रक्षा के लिए आग्रह किया। उनकी दृढ़ता से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पति को जीवनदान दिया और मगरमच्छ से उनकी रक्षा हुई।

इसी लोकमान्यता के आधार पर करवा चौथ की पूजा में सींकों को करवा माता की शक्ति और पति की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। यह कथा धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य श्रद्धा, समर्पण और दांपत्य जीवन के प्रति निष्ठा का संदेश देना है।

करवा चौथ की पूजा में कितनी सींकें इस्तेमाल की जाती हैं?

प्रचलित पूजा परंपरा के अनुसार, करवा चौथ में कुल 28 सींकों का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें सात-सात सींकों के चार समूहों में रखने की परंपरा बताई जाती है। इनमें सात सींकें करवे की टोंटी पर लगाई जाती हैं।

पूजा के दौरान महिलाएं करवा माता का पूजन करती हैं और परिक्रमा के समय भी करवे को धार्मिक परंपरा के अनुसार धारण करती हैं। हालांकि, सींकों की संख्या और उन्हें रखने की विधि स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग हो सकती है।

करवा चौथ की पूजा में किन चीजों का होता है इस्तेमाल?

करवा चौथ की पूजा के लिए सामान्यतः इन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है:

  • मिट्टी का करवा: पूजा में जल रखने और चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए।
  • सींकें: करवा माता से जुड़ी लोकमान्यता और पारंपरिक पूजा विधि के अनुसार।
  • छलनी: चंद्र दर्शन और पति का चेहरा देखने की परंपरा के लिए।
  • दीपक: पूजा और आरती के लिए।
  • चावल, रोली और मिठाई: तिलक, पूजन और भोग के लिए।
  • सुहाग सामग्री: वैवाहिक सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए।

पूजा सामग्री की सूची अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित रीति-रिवाजों के अनुसार बदल सकती है।

श्रद्धा और परंपरा से जुड़ा है सींकों का महत्व

करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, पारिवारिक विश्वास और दांपत्य जीवन के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है। करवे की टोंटी में सींकें लगाने की परंपरा इसी धार्मिक आस्था और करवा माता की प्रचलित कथा से जुड़ी हुई है।

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