किरंदुल में 1963 से अनवरत जारी बंगिय सोशल एंड कल्चरल एसोसिएशन की दुर्गा पूजा, महा सप्तमी पर हुई पुष्पांजलि और आरती

किरंदुल। बंगिय सोशल एंड कल्चरल एसोसिएशन द्वारा आयोजित सार्वजनिक शारदीय दुर्गा पूजा में महा सप्तमी के पावन अवसर पर शनिवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ पुष्पांजलि एवं आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा मंडप पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।

एसोसिएशन की यह दुर्गा पूजा वर्ष 1963 से लगातार आयोजित की जा रही है। छह दशक से अधिक समय से जारी यह धार्मिक परंपरा किरंदुल की सबसे प्राचीन दुर्गा पूजाओं में से एक है। हर वर्ष की तरह इस बार भी पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

कोलकाता और मलकानगिरी से पहुंचे पुजारी

इस वर्ष दुर्गा पूजा संपन्न कराने के लिए प्रथम पुजारी के रूप में कोलकाता से शंकर चक्रवर्ती को आमंत्रित किया गया है। वहीं, दूसरे पुजारी के रूप में मलकानगिरी से गोविंद भट्टाचार्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं। विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है।

सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर होंगे विशेष आयोजन

संस्था के अध्यक्ष विपुल राय, सचिव बिप्लब मल्लिक और कोषाध्यक्ष नीलतन घोष ने बताया कि महा सप्तमी के साथ अष्टमी और नवमी के अवसर पर भी विशेष पूजा-अर्चना, पुष्पांजलि और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पूजा मंडप पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन करने और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता निभाने की अपील की है।

बंगिय सोशल एंड कल्चरल एसोसिएशन की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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